बड़ी खबर : ऑल वेदर रोड का निर्माण कर रही कम्पनी निकली ब्लैक लिस्टेड। पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लगा पलीता

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक उत्तराखंड की ऑल वेदर रोड का निर्माण करने वाली कंपनी ब्लैक लिस्टेड निकली। जो उत्तराखंड की ऑल वेदर रोड के निर्माण में जमकर लापरवाही बरत रही है,पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को पलीता लगा रही है।

ऋषिकेश-बदरीनाथ ऑलवेदर रोड हाईवे पर पुरसाड़ी के पास सड़क किनारे बने आरसीसी दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे पूरा हाईवे बाधित हो गया।

जो ऑलवेदर रोड सीधे चीन बॉर्डर तक जाती है।वो उत्तराखंड के मानसून की पहली मार भी नहीं झेल पा रही है।

उत्तराखंड में बारिश के मौसम में सड़कों के टूटने और मुख्य मार्ग के टूटने से लोगों और पर्यटको को आने वाली समस्याओं को देखते हुए ही इन सभी समस्याओं के समाधान के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को ऑलवेदर रोड योजना के रूप में एक बड़ी सौगात दी थी, जो एक ही बारिश में धराशायी हो गई ।

ऑल वेदर रोड की सड़क बहने का यह कोई पहला मामला नहीं है,इससे पहले भी चंबा ऋषिकेश के पास ऑलवेदर रोड का एक बड़ा हिस्सा बह गया था। इतना ही नहीं अभी भी चमोली के उस हिस्से में 28 जगह सड़क डैमेज है, जहां हाल में ही सड़कें बहीं हैं।

 

ऑल वेदर रोड की घोषणा साल 2016 में पीएम मोदी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में की थी। इसके रोड को 2022 तक पुरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन बीच में कोरोना की वजह से काम को रोकना पड़ा।जिसके चलते काम को पूरा करने की डेडलाइन बढ़ानी पड़ी।

उत्तराखंड में ऑलवेदर रोड के तहत 889 किलोमीटर लंबी सड़क को डबल लेन किया जा रहा है।इस योजना का खर्च लगभग 12 हजार करोड़ रुपए है।लगभग 90% काम इस परियोजना में हो चुका है।

 

मगर ब्लैक लिस्टेड कंपनी पीएम मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पलिता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।इसकी गुणवत्ता में लापरवाही के चलते साल 2021 में और 2022 में भी ऑलवेदर रोड के कई हिस्से हल्की सी बरसात में भी बह गये हैं।  ऑलवेदर रोड चार दिन की बरसात में ढह कर नदी में समा गई। 

 

उत्तराखंड ऑल वेदर रोड का निर्माण करने वाली कंपनी हिलवेज को साल 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ब्लैक लिस्ट किया था। श्रीनगर स्थित चौरास पुल के गिरने की वजह से कई लोगों की मौत हो गई थी, उस वक्त जो कंपनी इस पुल का निर्माण कर रही थी,हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी उनमें से एक थी। तब पुल की जांच के बाद बकायदा कंपनी के लोगों की गिरफ्तारी के आदेश भी जारी हुए थे,जो इसके ब्लैक लिस्ट होने का बड़ा कारण बना।देश के अन्य राज्यों में भी इस कंपनी का काम चल रहा है, कई जगहों पर विवादों में आने के बाद कंपनी का काम रोका भी गया है।

बड़ा सवाल यहां यह है कि आखिर क्यों केंद्र और राज्य सरकार ऐसी कंपनियों को काम देती हैं जो पहले से ही ब्लैक लिस्टेड हो।

साथ ही यहां यह भी सवाल खड़ा होता है कि क्या पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को यह ब्लैक लिस्टेड कंपनी पलीता लगाती रहेगी या सरकार इस पर कोई एक्शन लेगी।

 

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