डॉक्टर चौबे को यमुना घाटी लाने का प्रयास,सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट/नीरज उत्तराखण्डी  धरती में अच्छे लोगों की कमी नहीं है, उनकी काबिलियत यह होती है कि उनसे मिलना जितना मुश्किल होता है मिलने पर वे उतने की सहज भाव से मिलते है और यथा  संभव समर्पित भाव से असहाय बीमारों और गरीबों की मदद भी करते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है डॉक्टर अश्वनी कुमार […]

रिपोर्ट/नीरज उत्तराखण्डी 

धरती में अच्छे लोगों की कमी नहीं है, उनकी काबिलियत यह होती है कि उनसे मिलना जितना मुश्किल होता है मिलने पर वे उतने की सहज भाव से मिलते है और यथा  संभव समर्पित भाव से असहाय बीमारों और गरीबों की मदद भी करते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत है डॉक्टर अश्वनी कुमार चौबे।

 कहते हैं कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप है लेकिन जब पेशे को सेवा से ज्यादा कमाई  या लूट का जरिया बनाने का दौर चल रहा हो और संवेदना शून्य हो चुकी हो| अधिकांश चिकित्सक पेशे से शैतान बन चुके हो, तो ऐसे दौर में  चंद चिकित्सक ऐसे भी हैं जो वास्तव में भगवान का रूप होते हैं। और डॉक्टर के पेशे का सम्मान बनाए हुए है।

हम उत्तरकाशी जिला चिकित्सालय में लम्बे समय तक अपनी  सर्वसुलभ सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं देकर आम जनता और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का उपचार और महज 5000 रुपये में जटिल ऑपरेशन कर दवाएं और नया जीवन देकर दुआएं कमाने वाले डॉक्टर अश्वनी कुमार चौबे की बात कर रहे हैं|जो आज भी जनता के जेहन में मौजूद है। फर्क है तो सिर्फ दूरियों का ।

डॉक्टर चौबे का स्थानांतरण जिला अस्पताल उत्तरकाशी  से रुद्रपुर के किंचा अस्पताल भले ही हो गया हो,लेकिन उत्तरकाशी के सीमांत ब्लाक मोरी के लोग आज भी अपना इलाज करवाने  रुद्रपुर किंचा सरकारी अस्पताल जा रहे है। क्योंकि डॉक्टर भरोसा और भगवान का दूसरा रूप है । मोरी के लोग किंचा जाकर अपना इलाज कर लौट रहे है। डॉक्टर चौबे मरीजों का इलाज ही नहीं कर रहे है बल्कि मरीजों की रुकने की व्यवस्था भी की।

मोरी ब्लाक के जखोल गांव निवासी राम लाल विश्वकर्मा अपने परिवार सहित तीन अन्य मरीजों को लेकर किंचा अस्पताल पहुंचे और इलाज के बाद दवाई लेकर घर लौटे।

विश्वकर्मा बताते हैं कि वे अपने परिवार सहित गांव के तीन अन्य मरीजों को लेकर किचा अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर चौबे ने  न केवल मरीजों का इलाज किया बल्कि रुकने और खाने की व्यवस्था भी कर दी।  डॉक्टर चौबे किचा जाने से वहां मरीजों की भीड़ बढ गई है।उन्होंने अस्पताल की दशा ही बदल दी है। उनका कहना है कि यदि डॉक्टर चौबे का स्थानांतरण पुरोला या नौगांव अस्पताल में हो जाता तो यमुना घाटी में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होता और ऑपरेशन के लिए देहरादून या ऋषिकेश दिल्ली चंडीगढ़ के अस्पतालों के चक्कर नही लगाने पड़ते। गरीब लोगों के लिए डक्टर चौबे भगवान का रूप है।

सभी को डॉक्टर चौबे को यमुना घाटी लाने का प्रयास करना चाहिए उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी भेजा है।

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