चिंताजनक: देहरादून में कोरोना सैंपलिंग लीडर डॉक्टर भी संक्रमित

देहरादून में कोरोना सैंपलिंग लीडर डॉक्टर भी संक्रमित

उत्तराखंड के देहरादून में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में एक डॉक्टर कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए गए हैं। यह डॉक्टर देहरादून में कोरोनावायरस सैंपलिंग टीम के लीडर हैं और कोरोनावायरस सैंपलिंग के लिए विकासनगर सेलाकुई आदि तक भी आते-जाते रहते थे। कोरोना के लक्षण पाए जाने पर इन डाक्टर का कल सैंपल लिया गया था और कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए जाने पर इन्हें देहरादून के एक होटल में बने कोविड केयर सेंटर मे भर्ती कर दिया गया है। इनके हाई रिस्क संपर्क में आने के चलते एक और बाबू का भी सैंपल लिया गया है तथा उन्हे भी क्वारंटाइन कर दिया गया है।

देहरादून के सीएमओ ने बताया कि, गांधी अस्पताल में तैनात इन बाबू ने मास्क का प्रयोग नहीं किया था तथा वह संक्रमित डॉक्टर के हाई रिस्क संपर्क में आए थे। अहम बात यह है कि, यह संक्रमित डॉक्टर देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ भी एक आध बार घूमते देखे गए थे, लेकिन ना तो अभी तक इनके संपर्क में आए अन्य लोगों को लेकर कोई एक्शन लिया गया है और ना ही जिस कार्यालय में इनका आना जाना था, उन कार्यालय को सील या सैनिटाइजेशन की भी कोई व्यवस्था की गई है।

जब देहरादून के सीएमओ से बात की गई तो उनका कहना था कि, वह उनके हाई रिस्क संपर्क में नहीं थे और जो भी अस्पताल के कर्मचारी अथवा डॉक्टर ऐसे लोग ऐसे लोगों से मिलते हैं वह भी पर्याप्त बचाव के साधन के साथ ही मिलते हैं तथा पर्याप्त डिस्टेंस मेंटेन करते हैं। इसलिए उनको क्वारंटाइन किए जाने की जरूरत नहीं है। जिस अस्पताल परिसर में कोरोना पॉजिटिव डॉक्टर का आना जाना था, उनके रूम को सील करने अथवा सैनिटाइज करने के बारे में सीएमओ ने कहा कि यह निर्णय कोविड सर्विलांस टीम करती है।

सीएमओ ने बताया कि, यदि मास्क आदि बचाव के साधनों का उपयोग किया जाए और निश्चित दूरी बरती जाए तो कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के साथ रहने पर भी वह सब लो रिस्क कैटेगरी में आते हैं। सीएमओ ने बताया कि, फिर भी ऐतिहायत के तौर पर रविवार को कोरोनेशन, गांधी शताब्दि, सीएमओ आफिस आदि सभी अस्पतालों के कर्मियों का कोरोनावायरस टेस्ट कराया जाएगा।

उत्तराखंड में जिस तरह से डॉक्टर, पुलिसकर्मी, नर्स आदि जैसे फ्रंटलाइनर कोरोना वारियर्स में संक्रमण बढ़ता जा रहा है, वह अपने आप ही चिंता की बात है। और इससे बचने के लिए बचाव और टेस्टिंग के पर्याप्त उपाय करने की आवश्यकता है। क्योंकि यदि फ्रंटलाइनर ही चपेट में आ जाएंगे तो फिर व्यवस्था गड़बड़ाने की बेहद आशंका है।

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