देश के पहले CDS बने जनरल विपिन रावत। तीनों सेनाओं की संभालेंगे कमान

अनुज नेगी
उत्तराखंड को एक और बड़ी उपलब्धि औऱ पहचान मिली है। जी हां उत्तराखंड के पौड़ी जिले के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीएम मोदी ने बिपिन रावत पर भरोसा जताते हुए उन्हें देश का पहला सीडीएस बनाया है।
देश के पहले CDS की जिम्मेदारी सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को सौंपी गई है। 1999 करगिल युद्ध के वक्त CDS पद
पर सुझाव लिए गए थे। पीएम मोदी ने इसी साल CDS पद का ऐलान कर दिया था।
भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद दिया गया है। सीडीएस का पद 4 स्टार रैंक के बराबर होता है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) एक ऐसा पद है, जिस पर रहने वाला अफसर तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा। चार स्टार जनरल रैंक के अधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया जाएगा, जिसको सैन्य प्रबंधन में विशेष योग्यता हासिल होगी।

आपको बतातेरा चलें CDS के पास होती है विशेष शक्तियां। सीडीएस तीनों सेनाओं से जुड़े मामलों में रक्षा मंत्री को सलाह देगा और उनका प्रधान सैन्य सलाहकार होगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त पर लाल किले से घोषणा करते हुए भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त करने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि सीडीएस सेना के तीनों अंगों (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) के बीच तालमेल सुनिश्चित करेगा और उन्हें प्रभावी नेतृत्व देगा।

1999 में दिया गया था CDS पद के लिए सुझाव

1999 में हुए करगिल युद्ध के बाद जब 2001 में तत्कालीन डिप्टी पीएम लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा की तो पाया कि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही. अगर तीनों सेनाओं के बीच ठीक से तालमेल होता तो नुकसान को काफी कम किया जा सकता था. उस वक्त चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) पद बनाने का सुझाव दिया था. वहीं 20 साल बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CDS पद सृजित करने का ऐलान किया था।

अभी तक इन देशों में है CDS पद

वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इटली, फ्रांस सहित करीब दस देशों में इसकी व्यवस्था थी, अब भारत का भी इसमें नाम जुड़ गया है। बता दें, कि हर देश अपने यहां सीडीएस को अलग अलग शक्तियां प्रदान करता है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय मजबूत होगा और सैन्य ऑपरेशन की स्थिति में रणनीति पर तेजी से अमल हो सकेगा।

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