देखिए वीडियो: चेयरमैन काॅलेज मे तोड़ फोड़ करते हुए कैमरे मे कैद, लेकिन छात्रों पर करा दी एफआइआर

देखिए यह है ओम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज रुड़की के माननीय चेयरमैन साहब जिन्होंने फीस बढोतरी के खिलाफ दिए माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को मानने से मना कर दिया। उसके बाद छात्रों द्वारा विरोध जताने पर खुद चेयरमैन ने कुर्सियां उठाई और अपने ही कॉलेज के शीशों को तोड़ डाला। https://youtu.be/2WrhNzfat4I   उनके गार्जियंस को बुलाया गया तथा […]

देखिए यह है ओम आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज रुड़की के माननीय चेयरमैन साहब जिन्होंने फीस बढोतरी के खिलाफ दिए माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों को मानने से मना कर दिया। उसके बाद छात्रों द्वारा विरोध जताने पर खुद चेयरमैन ने कुर्सियां उठाई और अपने ही कॉलेज के शीशों को तोड़ डाला।

https://youtu.be/2WrhNzfat4I

 

उनके गार्जियंस को बुलाया गया तथा उनके साथ किस कदर बर्बरता की गई, यह आप वीडियो में देख सकते हैं।

उनके साथ गलत शब्द का इस्तेमाल किया गया तथा उसके बाद एक छात्र के ऊपर झूठी एफआइआर दर्ज करा डाली।

मजेदार बात यह रही कि एफआइआर भी उस छात्र के नाम हुई जो उस दिन अपनी बहिन के साथ बाहर गया था। दूसरा इस तोड़ फोड़ की एफआइआर भी आराम से दो दिन बाद दर्ज की गयी।

देखें यह हालात उत्तराखंड के हैं और यहां पर शासन प्रशासन नेताओं मंत्रियों के दबाव में इतना है कि उसे यह भी नहीं दिखाई देता कि एक छात्र पर जो कि इस राज्य का और इस देश का भविष्य होता है, आप उसके लिए झूठा मुकदमा दर्ज करा रहे हैं !

सामाजिक कार्यकर्ता सावी वर्मा बताती हैं कि
ललित तिवारी पर कॉलेज के मालिक ने खुद कॉलेज में तोड़फोड़ करके उसके विरुद्ध झूठी FIR तक दर्ज़ कर दी।
उस बच्चे का इस कदर मानसिक उत्पीड़न और शोषण किया गया कि उसका चरित्र प्रमाण पत्र तक नहीं दिया गया जबकि ललित तिवाई टॉपर रहा है अपने कॉलेज में।
अन्य बच्चों पर भी इसी तरह का डर दिखा कर चुप बैठने को कहा जा रहा है पर अब बच्चो के साथ उनके माता-पिता और समाज के लोग भी साथ देने के लिए खड़े हैं ।
अब देखते हैं कि कैसे इनको न्याय नहीं मिलेगा ।

बहरहाल माननीय उच्च न्यायालय ने उस एफआइआर पर स्टे लगा दिया तथा चेयरमैन मुनीश सैनी जो अपने आप को बहुत ही शिक्षित बताते हैं, अगर इस तरह खुद ही तोड़ फोड़ करके गुनाह छात्रों के सर मढ देंगे तो तो भला जनता कब तक चुप बैठेगी ! शुक्र है कि सरकार का भले जो भी टोलरेंस हो लेकिन पब्लिक के टोलरेंस का लेबल बहुत ऊंचा लगता है।

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