तुगलकी फरमान : होटलों से होम डिलीवरी। कौन बनाएगा, कौन मंगाएगा, और कौन खाएगा !

अविकल थपलियाल  देहरादून। जब कोरोना से बचने के लिए पूरा विश्व साफ-सफाई और सामाजिक दूरी को मुख्य अस्त्र बनाकर चल रहा हो। ऐसे में नाटकीय ढंग से और लॉक डाउन के बीच देहरादून जिले के रेस्टोरेंट व होटल खोलने के आदेश कर दिए गए। वो भी इस ताकीद के साथ कि वे सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर […]

अविकल थपलियाल 

देहरादून। जब कोरोना से बचने के लिए पूरा विश्व साफ-सफाई और सामाजिक दूरी को मुख्य अस्त्र बनाकर चल रहा हो। ऐसे में नाटकीय ढंग से और लॉक डाउन के बीच देहरादून जिले के रेस्टोरेंट व होटल खोलने के आदेश कर दिए गए। वो भी इस ताकीद के साथ कि वे सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर पर भोजन की होम डिलीवरी करेंगे। अपने होटल में बैठाकर ग्राहक को खाना नही खिलाएंगे।


जनाब ऐसी क्या आफत आ गयी थी। कोरोना आतंक के बीच जब व्यक्ति पानी भी अपने हाथ से ले रहा है। ऐसे में होटल का ताजा-बासी खाना लेकर आये होम डिलीवरी बॉय से संक्रमित होने का खतरा नहीं है सरकार। इस समय सभी अपने घर का फ्रेश बना खाना खाने में ही भलाई समझ रहे हैं। कोरोना के डर से किसी की जबान इतनी चटोरी भी नहीं है कि बाहर का खाना खाकर जिंदगी से खिलवाड़ की। इस समय सभी को अपनी जिंदगी बचाने की पड़ी है।

देहरादून जिला प्रशासन ने यह आदेश जारी करने से पहले निम्न बिंदुओं पर विचार कर लिया होता:-
होटल मालिक को कम से कम अपना 75 प्रतिशत किचन स्टाफ बुलाना पड़ेगा। यह स्टाफ किचेन में क्या दूरी मेंटेन रखते हुए काम कर पायेगा? क्या इससे इंफेक्शन को बढ़ावा नहीं मिलेगा।
कई होटलों के पास होम डिलीवरी कोई की सुविधा नही हैं, वो कैसे मैनेज करेंगे।
देहरादून होटल स्वामी यह भी देख रहे हैं कि कोरोना के खतरे के बीच उनकी लागत निकल भी पाएगी या नहीं। और कितने लोग होम डिलीवरी आर्डर करेंगे।
बाजार से सब्जी व राशन लाने में भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ेगा।
देहरादून में वेतनभोगी कर्मचारी अधिक संख्या में है। यह वर्ग कम से कम 3 महीने का राशन जमा कर चुका है। वो पहले घर का राशन खत्म करेगा या होटल की डिशेज की ओर देखेगा। होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी इस अंकगणित को देख रहे हैं।
कोरोना के इन्फेक्शन को देखते हुए देहरादून के कई होटल मालिक सरकार के इस फैसले पर अमल नही कर रहे हैं। देहरादून जिला प्रशासन को 14 अप्रैल के लॉक डाउन पीरियड समीक्षा के बाद ही होटल से होम डिलीवरी के बाबत विचार करना चाहिए था।
जो लोग स्वंय खाना नहीं बना पा रहे हैं या मजबूर हैं। उनके लिए भोजन की व्यवस्था कई एनजीओ व सरकारी तंत्र कर ही रहे हैं। ऐसे लोगों को प्रशासन चिन्हित कर भोजन की व्यवस्था करे न कि होम डिलीवरी को बढ़ावा दे इस संकट में।
देहरादून जिला प्रशासन का होटल खोलने का फैसला समझ से परे है। सरकार का यह फैसला लोगों की सेहत से खिलवाड़ न कर दे। लिहाजा सरकार को होटल से होम डिलीवरी का फैसला जनहित में वापस ले लेना चाहिए।
(कोरोना खतरे को देखते हुए यह लेखक की निजी राय है, अब सरकार माने या नहीं, ये उनका विशेष अधिकार।)

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