अतिक्रमण को हटाने के निर्देश:उत्तराखंड उच्च न्यायालय

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार में नजूल भूमि और बद्रीनाथ हाइवे पर अतिक्रमण करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए कोटद्वार के नगर निगम को 15 दिन के भीतर अतिक्रमणकारियों के कागज़ों की जांच कर दो माह के भीतर अतिक्रमण को […]

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार में नजूल भूमि और बद्रीनाथ हाइवे पर अतिक्रमण करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए कोटद्वार के नगर निगम को 15 दिन के भीतर अतिक्रमणकारियों के कागज़ों की जांच कर दो माह के भीतर अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए है।

मुख्य न्यायाधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में कोटद्वार निवासी मुजीब नैथानी की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई ।अधिवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने बताया की याचिका में कहा गया है कि कोटद्वार में

नजूल भूमि और बद्रीनाथ हाइवे पर लोगों ने अतिक्रमण करके निर्माण कार्य किया है । इससे हाइवे संकरा हो गया है और आये दिन जाम लगा रहता है, इसलिए वहां से अतिक्रमण हटाया जाए । पूर्व में न्यायालय ने नजूल भूमि और हाइवे के आसपास से अतिक्रमण को आठ सप्ताह के भीतर हटाने के आदेश दिये थे। इस आदेश से ना खुश कुछ अतिक्रमणकारी सुप्रीम कोर्ट चले गए थे । निगम ने पुलिस और प्रशासन की मदद से आधे अतिक्रमणकारियों को हटाया ही था कि इसी बीच कुछ अतिक्रमणकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए थे। आज उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में बदलाव करते हुए कोटद्वार के नगर निगम को 15 दिन के भीतर अतिक्रमणकारियों के कागज़ों की जांच कर दो माह के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं ।

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