फर्जी दस्तावेज: सिंचाई विभाग में प्रशासनिक अधिकारी पर मुकदमा दर्ज ..

देहरादून, 23 अगस्त 2025: उत्तराखंड सिंचाई विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी पाने वाली महिला कार्मिक अंशुल गोयल के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। वर्तमान में वह उत्तराखंड जल संसाधन प्रबंधन और नियामक आयोग, यमुना कॉलोनी, देहरादून में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। अब सहायक अभियंता की तहरीर पर देहरादून […]

देहरादून, 23 अगस्त 2025: उत्तराखंड सिंचाई विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी पाने वाली महिला कार्मिक अंशुल गोयल के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। वर्तमान में वह उत्तराखंड जल संसाधन प्रबंधन और नियामक आयोग, यमुना कॉलोनी, देहरादून में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात हैं। अब सहायक अभियंता की तहरीर पर देहरादून की कैंट कोतवाली में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

कैसे हुआ मामला दर्ज?

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2009 में अंशुल गोयल ने मृतक आश्रित कोटे से सिंचाई विभाग में नौकरी पाई थी। शुरुआत में उन्हें कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्त किया गया और बाद में पदोन्नति पाकर वे प्रशासनिक अधिकारी बनीं। इस बीच, विनीत अग्रवाल, निवासी निंबूवाला गढ़ी कैंट ने अंशुल गोयल के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच की मांग करते हुए विभाग को शिकायत भेजी।

इसके बाद, मुख्य अभियंता (स्तर-2), सिंचाई विभाग, उत्तराखंड ने 18 फरवरी 2025 को एक जांच समिति गठित की। जांच के दौरान पता चला कि अंशुल गोयल द्वारा प्रस्तुत हाईस्कूल की अंकतालिका और प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी हैं।

जांच में क्या निकला सामने?

  • राजकीय इंटर कॉलेज पटेलनगर ने रिपोर्ट दी कि वर्ष 2001 में अनुक्रमांक 2206742 पर अंशुल गोयल नामक कोई छात्रा पंजीकृत नहीं थी।
  • उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर (नैनीताल) ने भी पुष्टि की कि दिए गए अनुक्रमांक पर अंशुल गोयल का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
  • दोनों संस्थानों की पुष्टि के बाद जांच समिति ने उनके प्रमाणपत्रों को कूटरचित माना।

कानूनी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्य मंडल, उत्तरकाशी ने मामले को आगे बढ़ाते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता से विधिक परामर्श लिया। कानूनी राय में यह साफ हुआ कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अंशुल गोयल अपने पद पर बने रहने की अधिकारी नहीं हैं।

इसके बाद, सहायक अभियंता इंद्र सिंह की तहरीर पर कैंट कोतवाली पुलिस ने अंशुल गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

बड़ा सवाल: विभागीय लापरवाही या साजिश?

यह मामला विभागीय लापरवाही को उजागर करता है कि फर्जी दस्तावेजों के बावजूद 16 साल से अधिक समय तक अंशुल गोयल ऊंचे पद पर कार्यरत रहीं। अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी लंबी अवधि तक यह फर्जीवाड़ा कैसे छिपा रहा और इसमें किन अधिकारियों की मिलीभगत रही।

👉 अब इस मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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