विभिन्न राज्यों में फंसे हैं हजारों प्रवासी। भाजपा नेता ने छपवाए एडवांस में त्रिवेंद्र का आभार वाले पोस्टर

उत्तराखंड के हजारों प्रवासी अभी देश के विभिन्न स्थानों में फंसे हुए हैं। सरकार का उनसे कोई संपर्क तक नहीं है लेकिन उत्तराखंड में भाजपा नेता एडवांस में ही उनको उत्तराखंड पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जता रहे हैं।  टिहरी के जिला अध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने पोस्टर छपवा कर बाकायदा त्रिवेंद्र […]

उत्तराखंड के हजारों प्रवासी अभी देश के विभिन्न स्थानों में फंसे हुए हैं। सरकार का उनसे कोई संपर्क तक नहीं है लेकिन उत्तराखंड में भाजपा नेता एडवांस में ही उनको उत्तराखंड पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जता रहे हैं।

 टिहरी के जिला अध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने पोस्टर छपवा कर बाकायदा त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार जताते हुए लिखा है कि “विभिन्न प्रांतों में फंसे प्रदेश के नागरिकों को माननीय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के अथक प्रयास से सकुशल घर वापसी कराने पर भारतीय जनता पार्टी जनपद टिहरी हार्दिक आभार व्यक्त करती है।”
 लोग सोशल मीडिया पर इसकी जमकर खिल्ली उड़ा रहे हैं। दूसरे राज्य में फंसे टिहरी के ही धर्मेंद्र सेनवाल कहते हैं कि वे “लोग तो अभी सब के सब उधर ही फंसे है।। बस केवल 40-50 लोगों को ही ले गई और इतने पर ही धन्यवाद दे रहे हो। बाकी लोग भी फंसे हुए हैं।। सबको घर लाओ तो जनता धन्यवाद देगी।”
 वहीं हरियाणा में फंसे टिहरी के दिनेश रावत उसी पोस्ट पर लिखते हैं कि “भाई क्यों झूठ बोलते हो ! हम लोग तो यहीं हरियाणा में फंसे हुए हैं।” 
किंतु इन कमेंट का संज्ञान लेने तक की जरूरत टिहरी की भारतीय जनता पार्टी अथवा जिला अध्यक्ष विनोद रतूड़ी ने नहीं समझी।
शीशपाल सिंह पवार कहते हैं कि ,“किसको सकुशल घर लाए ! मेरे गांव का एक भी लड़का अभी तक घर नहीं आया। सब के सब फंसे पड़े हैं बेचारे जो जहां है।”
 कुछ दिनों पहले दुबई में हार्टअटैक के चलते टिहरी निवासी कमलेश भट्ट का देहांत हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को लेकर पूरे देश-विदेश और उत्तराखंड में हंगामा बरपा रहा, लेकिन भाजपा टिहरी की इकाई इस पर खामोशी ओढ़े रही।
 लोगों का कहना है कि सरकार राज्य से बाहर फंसे प्रवासियों को लेकर हो रही बदनामी से बचने के लिए सिर्फ कुछ प्रवासियों को लाकर मीडिया में यह खबरें चलाना चाहती है कि सरकार प्रवासियों के प्रति संवेदनशील है।
 जबकि हकीकत यह है कि हजारों प्रवासी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, गुजरात, मुंबई, इंदौर आदि जगहों पर फंसे हुए हैं। उनके लिए सरकार के पास न तो कोई योजना है और ना ही सरकार उन्हें वापस लाना चाहती है।

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