अजब-गजब : लोग झोपड़ों में रहने को मजबूर। सरकारी भवनों में रह रहे गूणी बांदर

रिपोर्ट- इंद्रजीत असवाल पौड़ी गढ़वाल।  यूँ तो पहाड़ो में सरकारी बजट की बंदर बांट की खबर कोई नई नही है। लेकिन जो खबर हम आज आपको दिखा रहे हैं, उसमें खुद बंदरो लंगूरों ने कब्जा किया है। आप पहली खबर आज देख रहे होंगे जिसमे किसी सरकारी संपत्ति के ऊपर बंदरो व लंगूरों ने कब्जा […]

रिपोर्ट- इंद्रजीत असवाल

पौड़ी गढ़वाल।

 यूँ तो पहाड़ो में सरकारी बजट की बंदर बांट की खबर कोई नई नही है। लेकिन जो खबर हम आज आपको दिखा रहे हैं, उसमें खुद बंदरो लंगूरों ने कब्जा किया है। आप पहली खबर आज देख रहे होंगे जिसमे किसी सरकारी संपत्ति के ऊपर बंदरो व लंगूरों ने कब्जा किया होगा।

जी हां, ये खबर लैंसडाउन विधानसभा के ढाबखाल की है जहां पर विगत पांच साल पहले एक मातृत्व शिशु कल्याण केंद का निर्माण हुआ था, जो ढाबखाल टू कोलागड पैदल मार्ग पर बना था। जिसके कारण पैदल मार्ग भी इसी बिल्डिंग के मेन गेट से जा रहा है।

आज यहाँ का मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र की ANM रिखणीखाल से केंद्र चला रही है।

स्थानीय व्यक्ति हरीश रावत ने बताया कि, ये मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र 5 साल से तैयार है, पर ये आज तक विभाग के अंडर नही हुआ। इसके कारण ग्रामीणों का रास्ता भी बन्द है व आज इसमे जंगली जानवरों का कब्जा है।

इसी मामले में यहाँ की क्षेत्रपंचायत सदस्य चंद्रकला देवी ने बताया कि, इस मामले में कई बार विभाग को सूचित किया गया, लेकिन हालात जस के तस है। इस केंद्र पर आज बंदरो का कब्जा है।

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