लोकायुक्त कानून को लेकर दायर पी.आई.एल.में न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब ।

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त कानून को लेकर दायर जनहित याचिका में सरकार से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है ।

मुख्य न्यायाधीश आर.सी.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई की ।हल्द्वानी निवासी याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी ने अपनी याचिका में न्यायालय से राज्य में लोकायुक्त बिल तत्काल लागू करने की प्रार्थना की है ।

मामले के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी सरकार में लाया गया सशक्त लोकायुक्त बिल 2013 में सदन से पास हुआ था। ये कानून बिना दबाव के पूर्ण रूप से सक्षम और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई करने में सक्षम था । लेकिन वर्ष 2014 में कांग्रेस सरकार आते ही लोकायुक्त बिल को निरस्त करते हुए एक नया लोकायुक्त बिल लाया गया, लेकिन ये पास नहीं हुआ ।

वर्ष 2017 में पुनः बी.जे.पी.की सरकार आई, तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार फिर से एक नया लोकायुक्त बिल लाई। त्रिवेंद्र सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से ‘बिना विपक्ष की आपत्ति के’ इस लोकायुक्त बिल में संशोधन के लिए प्रवर समिति को सौंप दिया।

लोकायुक्त बिल को विधानसभा के पटल पर रखा गया । इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में दायर एक याचिका के दौरान उत्तराखंड सरकार ने कहा कि राज्य में एक सशक्त लोकायुक्त बिल लाने की प्रक्रिया चल रही है ।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के इस स्टेटमेंट के बाद उत्तराखंड में लोकायुक्त के संबंध में दायर याचिका को निस्तारित कर दिया था । याचिकाकर्ता रविशंकर जोशी का कहना है कि उत्तराखंड राज्य में किसी भी दल की सरकार हो, वह लोकायुक्त को लागू करने को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। कोई भी सरकार नहीं चाहती है कि राज्य में एक सशक्त लोकायुक्त कानून लागू हो।

 

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