सस्ता गल्ला बना महंगा। सरकारी रेटों की धज्जियां उड़ा रहे हैं सस्ते गल्ले के डीलर।

इंद्रजीत असवाल

पौड़ी गढ़वाल 

सतपुली : 

यूँ तो लूट खसोट हर विभाग में चरम सीमा पर है यदि कभी किसी के भरस्टाचार की पोल खुलती भी है तो जांच के नाम पर सालों बीत जाते हैं ।

आज जो कहानी हम आपको दिखा रहे हैं वो है सरकारी सस्ते गल्ले की राशन से सम्बंधित है बीते दिनों में हमारे पास खबर आई थी कि सतपुली क्षेत्र में APL राशन कार्ड पर डीलरों द्वारा कार्ड धारकों को जमकर लूटा जा रहा है ।

हमारी पड़ताल सबसे पहले सतपुली में हुई तो पता चला कि यहाँ पर सस्ते गल्ले वालो के द्वारा APL कार्ड धारकों को 17 रुपये किलो चावल दिया जा रहा है ।  वही सतपुली से 15- 20 किलोमीटर के दायरे में कही पर 13 रुपये कही पर 15 रुपये किलो चावल APL कार्ड पर दिया जा रहा हैं ।

सस्ते गल्ले की दुकानों की समय समय पर उपजिलाधिकारी व सप्लाई इंस्पेक्टर द्वारा जांच भी होती है परन्तु रजिस्टर में डीलरों द्वारा 11 रुपये ही अंकित किया जाता है जबकि जो दिया जाता है वो 15 ,17 ,13  रुपये है।

अब जब इस मामले में हमारे द्वारा कुछ डीलरों से बात की गई तो उनका कहना था कि उनको किराया भी पूरा नहीं मिलता न ही पल्लेदारी पूरी दी जाती है ,उनके द्वारा कोविड काल में फ्री राशन वितरण का भी किराया नही मिला है ।

जो रेट सरकार द्वारा कई साल पहले तय किये गए थे उन्ही पर आज भी कार्य हो रहा है जबकि अब गाड़ी भाड़ा पल्लेदारी आदि सभी बहुत बढ़ चुके हैं ।

दूसरी बात एक और अहम है कि डीलरों को जो गोदाम से राशन के 50 केजी के कट्टे दिए जाते हैं उनमें 45 , 47, 48 किलो ही राशन रहता है जबकि डीलर इस कमी को स्वयं ही वहन करते हैं।

हर सस्ते गल्ले की दुकानों पर रेट लिस्ट लागये गए हैं , यदि ओबर रेट की कोई शिकायत नही आई है यदि ओबर रेट वाली बात सही है तो जल्द उन पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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