एक्शन: नकली दवाइयों की पैकिंग तैयार करने वाला प्रिंटिंग प्रेस मालिक हिमाचल से गिरफ्तार

देहरादून, 21 अगस्त 2025। उत्तराखंड एसटीएफ (STF Uttarakhand) ने नकली दवाइयों (Fake Medicines) के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के बद्दी क्षेत्र से ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयों की पैकिंग तैयार करने वाले प्रिंटिंग प्रेस मालिक विजय कुमार पांडे को गिरफ्तार किया है। आरोपी नकली जीवन रक्षक दवाइयों (Fake Life-Saving […]

देहरादून, 21 अगस्त 2025।
उत्तराखंड एसटीएफ (STF Uttarakhand) ने नकली दवाइयों (Fake Medicines) के कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के बद्दी क्षेत्र से ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयों की पैकिंग तैयार करने वाले प्रिंटिंग प्रेस मालिक विजय कुमार पांडे को गिरफ्तार किया है। आरोपी नकली जीवन रक्षक दवाइयों (Fake Life-Saving Drugs) की पैकिंग सामग्री तैयार कर गिरोह को सप्लाई करता था।

नकली दवा बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़

एसटीएफ ने अब तक इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह अलग-अलग ब्रांडेड कंपनियों की जीवन रक्षक दवाइयों की हूबहू नकल कर नकली दवाइयां तैयार करता था और उन्हें बाजार में बेचता था। इन नकली दवाओं के प्रयोग से आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था, साथ ही सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व की हानि भी हो रही थी।

जून में मिले थे नकली रैपर और पैकिंग सामग्री

एसटीएफ ने 1 जून को कार्रवाई करते हुए संतोष कुमार नामक व्यक्ति को भारी मात्रा में नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड (Fake QR Code) के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच में नवीन बंसल, आदित्य काला, देवी दयाल गुप्ता और पंकज शर्मा को भी पकड़ा गया।

पूछताछ में पता चला कि आरोपी नवीन बंसल ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवाइयां तैयार कर उन्हें प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल में पैक करता था। इन फॉयल्स की प्रिंटिंग के लिए वह बद्दी स्थित एसवी फॉयल कंपनी के मालिक विजय कुमार पांडे की मदद लेता था। पांडे साल 2021 से इस कारोबार में शामिल था और उसने फर्जी आईडी से एक मोबाइल सिम भी आरोपी नवीन को उपलब्ध कराया था, जिससे नकली दवाइयों का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।

एसटीएफ की पूछताछ में खुलासे

एसटीएफ पूछताछ में विजय कुमार पांडे ने स्वीकार किया है कि वह आरोपी नवीन बंसल और प्रदीप कुमार के बताए अनुसार किसी भी ब्रांडेड दवा कंपनी का नाम और क्यूआर कोड प्रिंट कर देता था। अब STF यह जांच कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किन राज्यों में इनका नेटवर्क फैला हुआ है।

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