शर्मनाक : डिस्चार्ज न करने पर महिला चिकित्सक को सस्पेंड की धमकी। मरीज निकला पॉजिटिव

क्वारंटाइन सेंटर की प्रभारी महिला चिकित्सक को दी सस्पेंड करने की धमकी, मरीज निकला कोरोना पाज़िटिव देहरादून के एक क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे एक मरीज को उसकी रिपोर्ट आए बिना डिस्चार्ज करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस अधिकारी, देहरादून डॉ० राजीव दीक्षित ने क्वारंटाइन सेंटर की प्रभारी डॉक्टर मीरा रावत(आयुष महिला चिकित्सा […]

क्वारंटाइन सेंटर की प्रभारी महिला चिकित्सक को दी सस्पेंड करने की धमकी, मरीज निकला कोरोना पाज़िटिव

देहरादून के एक क्वारंटाइन सेंटर में रह रहे एक मरीज को उसकी रिपोर्ट आए बिना डिस्चार्ज करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस अधिकारी, देहरादून डॉ० राजीव दीक्षित ने क्वारंटाइन सेंटर की प्रभारी डॉक्टर मीरा रावत(आयुष महिला चिकित्सा अधिकारी) पर दबाव बनाया और डिस्चार्ज करने का मौखिक आदेश दिया। डॉक्टर मीरा रावत के अनुसार उन्होंने कहा कि अभी तक मरीज की टेस्ट रिपोर्ट नहीं आई है जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक डिस्चार्ज करना उचित नहीं है लेकिन डॉक्टर राजीव दीक्षित ने बिना रिपोर्ट आए डिस्चार्ज करने का दबाव बनाया और डिस्चार्ज न करने पर सस्पेंड करने की धमकी दी।

 

जब डॉक्टर मीरा रावत ने लिखित में आदेश जारी करने का अनुरोध किया तो डॉक्टर राजीव दीक्षित भड़क गए और मौखिक आदेश न मानने पर उन्हें सस्पेंड करने और परिणाम भुगतने की धमकी दे डाली।

और अब 2 दिन बाद उसी मरीज की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

इस तरह से उच्च अधिकारी के अनुचित दबाव में आकर में आकर रिपोर्ट आने से पहले ही डिस्चार्ज किए गए संदिग्ध कोरोना संक्रमित, जो कि बाद में कोरोना पाजिटिव पाया गया है, द्वारा डिस्चार्ज करने के बाद कहां-कहां संक्रमण नहीं फैलाया गया होगा, इस संक्रमण​ फैलने के संभावित खतरे की आंशका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

डॉ० राजीव दीक्षित के इस प्रकार से सस्पेंड करने की धमकी देने के कार्य व्यवहार को अन्य चिकित्सकों को भी सहना पड़ा है।

राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ(पंजीकृत) के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला द्वारा बताया गया कि इस तरह की घटनाएं निन्दनीय है जिनसे कि विगत 3 माह से बिना किसी अवकाश के लगातार कार्य करने वाले फ्रन्टलाइन आयुष कोरोना वारियर्स का मनोबल तो गिरता ही है साथ में इस तरह के दबाव के कारण आयुष चिकित्सकों को अनुचित और नियम विरुद्ध कार्य करने को बाध्य होना पड़ता है, कोई बात हो जाने पर जिसका खामियाजा भी आखिर में उन्हें ही झेलने को मजबूर होना पड़ता है, क्यूंकि इस तरह का आदेश और धमकी देने वाले अधिकारी खुद को बड़ी ही चालाकी से बचा लेते है।

इस घटना की जिला आयुर्वेद एवं यूनानी सेवा संघ, देहरादून एवं आयुष चिकित्सकों द्वारा घोर निंदा की गयी। जिला संघ अध्यक्ष डॉ० एच० एस० धामी* एवं जिला सचिव डॉ० दीपांकर बिष्ट, प्रान्तीय उपाध्यक्ष डॉ० अजय चमोला द्वारा इस प्रकरण को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, देहरादून एवं जिलाधिकारी, देहरादून, के साथ-साथ निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, उत्तराखण्ड और महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तराखण्ड के समक्ष रखने की बात कही गयी है।

अब देखने वाली बात यह है जीरो टालरैन्स की त्रिवेन्द्र सरकार में शासन प्रशासन ऐसे अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है जो फील्ड में कार्य करने वाले चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारियों को मौखिक आदेश देकर उनका मनोबल गिराते हैं और नियम कानून को ताक पर रखकर धमकी देते हैं।

Also Read This

बड़ी खबर : यमुनोत्री हाईवे चौड़ीकरण के बाद सौली गांव में भूधंसाव का आरोप। 11 परिवार प्रभावित, चार ने छोड़े घर

नौगांव (उत्तरकाशी)। नीरज उत्तराखंडी नौगांव क्षेत्र के सौली गांव में भूधंसाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बीते दिनों हुई भारी बारिश के...

बड़ी खबर : UKSSSC की 23 अगस्त को प्रस्तावित परीक्षा स्थगित, ये हैं वजह 

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने 23 अगस्त...

Related Posts