टीचर से गलत सवाल पूछकर शिक्षा मंत्री की उड़ी मजाक!

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे विद्यालयों के निरीक्षण पर निकलने के दौरान एक विद्यालय में शिक्षिका से गलत सवाल पूछ बैठे। यह वीडियो सोशल मीडिया में आने पर शिक्षा मंत्री का अध्यापकों से लेकर आम लोग भी खूब मजाक उड़ा रहे हैं। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने भरी क्लास में विज्ञान की अध्यापिका से पूछा कि […]

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे विद्यालयों के निरीक्षण पर निकलने के दौरान एक विद्यालय में शिक्षिका से गलत सवाल पूछ बैठे। यह वीडियो सोशल मीडिया में आने पर शिक्षा मंत्री का अध्यापकों से लेकर आम लोग भी खूब मजाक उड़ा रहे हैं।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने भरी क्लास में विज्ञान की अध्यापिका से पूछा कि माइनस प्लस माइनस क्या होता है? शिक्षिका पहले तो इस अटपटे सवाल पर चौंकी लेकिन शिक्षामंत्री के बार-बार पूछने पर शिक्षिका ने कहा कि माइनस प्लस माइनस माइनस ही होगा।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे इस जवाब पर बिफर गए और शिक्षिका को जमकर लताड़ लगाई। साथ ही ब्लैक बोर्ड पर लिखते हुए बताया कि माइनस प्लस माइनस प्लस होता है।

इस तरह का अटपटा सवाल और अटपटा जवाब देकर शिक्षा मंत्री खुद ही मजाक बन कर रह गए। इस सवाल को देखकर साफ पता चल रहा है कि शिक्षा मंत्री ने यह सवाल क्लास की छात्र छात्राओं के सामने शिक्षिका को अपमानित करने की दृष्टि से पूछा था।

अन्यथा बच्चों की कक्षा के हिसाब से या सवाल बच्चों की शैक्षिक स्तर को देखते हुए भी कोई अन्य सवाल  पूछा जा सकता है। जाहिर है कि शिक्षा मंत्री को यह इल्म था कि इस सवाल का जवाब शिक्षिका के पास नहीं होगा और वह शर्मिंदा हो जाएगी।

यदि शिक्षा मंत्री को एक अध्यापिका की गरिमा का जरा भी ख्याल होता तो वह अध्यापिका का शैक्षिक स्तर जानने के लिए उसी स्तर का सवाल पूछते, जिस कक्षा के छात्र क्लास में थे और यदि कोई गलती होती भी तो वह शिक्षिका को प्रधानाध्यापक कक्ष या अलग से समझा सकते थे।

किंतु उन्होंने सार्वजनिक रूप से बच्चों के सामने ही शिक्षिका का मजाक बना दिया। अध्यापकों का पेशा  सम्मान का पेशा है किंतु अध्यापकों के लिए शिक्षामंत्री पहले भी रफ शब्दावली इस्तेमाल करते रहे हैं।  शिक्षा मंत्री की इस हरकत से अध्यापकों में ख़ासा आक्रोश है और वह सोशल मीडिया पर जमकर अरविंद पांडे का मजाक उड़ा रहे हैं।

ड्रेस कोड को लेकर पहले ही शिक्षामंत्री बैकफुट पर हैं और उनके द्वारा शुरु की गई कक्षाओं के निरीक्षण की एक सही पहल उनके व्यवहार के कारण मजाक बनकर रह सकती है।

इससे  स्कूलों की सुधारीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास धूमिल होने की संभावना है ।बल्कि शैक्षिक माहौल के खराब करने वाले अध्यापकों को भी इस तरह के हल्के व्यवहार से बढ़ावा मिल सकता है। आप भी सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ मजाक ओके स्क्रीन शॉट पढ़कर यह अंदाजा लगा सकते हैं कि शिक्षा मंत्री किस तरह अपने ही जाल में फंस गए!!

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