दोगला मानदंड : भाजपा नेता का सेंटर छोड़ेंगे, दूसरे का तोड़ेंगे !

अतिक्रमण पर फिर फंसी सरकार देहरादून में हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ अभियान पिक एंड चूज के आधार पर फंस कर रह गया है।  यहां सत्ता के नजदीकी लोगों के अतिक्रमण पर सरकार आंख मूंदे बैठी है तो सीधे साधारण लोगों के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है। गामा के साथ एक और हंगामा […]

अतिक्रमण पर फिर फंसी सरकार देहरादून में हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ अभियान पिक एंड चूज के आधार पर फंस कर रह गया है।
 यहां सत्ता के नजदीकी लोगों के अतिक्रमण पर सरकार आंख मूंदे बैठी है तो सीधे साधारण लोगों के खिलाफ जोरदार अभियान चल रहा है।
गामा के साथ एक और हंगामा
 पूरे देहरादून शहर में सैकड़ों ऐसे उदाहरण हैं, जहां सरकार और भारतीय जनता पार्टी के खास लोगों के अतिक्रमणों और आवासीय भवनों में चल रहे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बचाया जा रहा है।
 मुख्यमंत्री के खास सुनील उनियाल गामा के अतिक्रमण पर सरकार के दोहरे रवैए की अभी खबर चल ही रही थी कि एक और उदाहरण सामने आया है।
बलजीत सोनी है सह मीडिया प्रभारी 
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ दिन-रात घूमने वाले भारतीय जनता पार्टी के सह मीडिया प्रभारी बलजीत सिंह सोनी का देहरादून के सुभाष रोड पर स्थित प्रतिष्ठान छोड़ दिया गया है।
बलजीत सिंह सोनी ने अधिकारियों के बीच अपने वह फोटो भी दिखाए, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं।
कुछ दिन पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान की टीम को कड़े निर्देश दिए गए थे कि वह देखभाल कर ही कार्यवाही करें।
पहली मंजिल को नोटिस,दूसरी को छोड़ा 
 अजय भट्ट के इस आदेश के बाद देहरादून के सुभाष रोड स्थित बलजीत सिंह सोनी के प्रतिष्ठान को छोड़ दिया गया।
गौरतलब है कि जिस दूसरी मंजिल पर बलजीत सिंह सोनी का व्यावसायिक सैलून ट्रेनिंग सेंटर चल रहा है, उसके ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल को सीलिंग का नोटिस दिया गया है। उन्होंने आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक काम शुरू किया हुआ है।
 बलजीत सिंह सोनी से उनका पक्ष जानने के लिए पर्वतजन संवाददाता द्वारा उनसे बात की गई तो उनका भी यही कहना था उन्हे कोई नोटिस नही मिला है।
 देखने वाली बात यह है कि ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल को तो डबल इंजन सरकार अवैध बता रही है किंतु उसके ऊपर बलजीत सिंह सोनी के नियम विरुद्ध अवैध ट्रेनिंग सेंटर पर कार्यवाही करने से सरकार बच रही है।
 देखना है कि सरकार का यह दोहरे आचरण वाला मापदंड किस प्रकार धरातल पर उतरता है और सरकार ऐसे लोगों के बारे में न्यायालय को क्या जवाब दाखिल करती है !!

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