विधायकों की पेंशन समाप्त कराने को लेकर न्यायालय जाने की तैयारी

पूर्व विधायक को मिलती है 40 हजार पेंशन। 65 वर्ष पश्चात बने हैं अलग-अलग पायदान। प्रदेश पर वर्तमान में है 40 हजार करोड़ से अधिक ऋण, विधायक समाज सेवक न रहकर बन गये सरकारी कर्मचारी। वर्कचार्ज/तदर्थ कर्मचारी 30-35 वर्ष सेवा के बाद भी पेंशन का हकदार नहीं वर्तमान में उत्तराखंड की माली हालत को देखते […]

पूर्व विधायक को मिलती है 40 हजार पेंशन। 65 वर्ष पश्चात बने हैं अलग-अलग पायदान। प्रदेश पर वर्तमान में है 40 हजार करोड़ से अधिक ऋण, विधायक समाज सेवक न रहकर बन गये सरकारी कर्मचारी। वर्कचार्ज/तदर्थ कर्मचारी 30-35 वर्ष सेवा के बाद भी पेंशन का हकदार नहीं

वर्तमान में उत्तराखंड की माली हालत को देखते हुए पूर्व विधायकों को दी जाने वाली पेंशन समाप्त कराने को लेकर न्यायालय में जाने की तैयारी की जा रही है। इसके पीछे तर्क यह है कि जब 30-35 साल सेवा करने के बाद सरकारी कर्मचारी, वर्कचार्ज, तदर्थ कर्मचारी भी पेंशन का हकदार नहीं हैं तो फिर ऐसे में सरकार गरीब प्रदेश के सरकारी खजाने को अनावश्यक रूप से क्यों खाली कर रही है?


प्रदेश पर लगभग 40 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज है तथा ब्याज चुकाने के लिए सरकार कर्ज ले रही है। ऐसी माली हालत में विधायकों को पेंशन का औचित्य समझ से परे है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व विधायकों को वर्ष 2008 में 6 हजार, वर्ष 2010 में 10 हजार, वर्ष 2014 में 20 हजार तथा 2018 में त्रिवेन्द्र की दरियादिल सरकार ने 40 हजार रुपये कर दी है।

इसके साथ-साथ पेंशन मामले में उम्र के हिसाब से अलग-अलग पायदान बनाये गये हैं, जिसमें 65 वर्ष के पश्चात् 5 फीसदी, 70 वर्ष के पश्चात् 10 फीसदी, 75 के पश्चात 25 फीसदी तथा 80 वर्ष के उपरान्त 50 फीसदी अतिरिक्त पेंशन की व्यवस्था है। आलम यह है कि गलत नीतियों एवं तुष्टिकरण के चलते आज विधायक समाज सेवक न होकर सरकारी सेवक बन गये हैं, जो कि लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए घातक है।


प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए (वर्ष 2005) के पश्चात पेंशन व्यवस्था को ही खत्म कर दिया गया है। सिर्फ अंशदायी पेंशन है, लेकिन इन पूर्व विधायकों (अघोषित सरकारी कर्मचारियों) के लिए जीवन पर्यन्त पेंशन की व्यवस्था है। उक्त पेंशन से प्रदेश का खजाना निरंतर खाली होता जा रहा है।


इस संबंध में जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष एवं जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश की बड़ी दयनीय स्थिति है। इसे देखते हुए मोर्चा पूर्व विधायकों की पेंशन समाप्त कराने को लेकर न्यायालय में शीघ्र ही दस्तक देने वाला है।

नेगी तर्क देते हुए कहते हैं कि प्रदेश में हजारों वर्कचार्ज/तदर्थ कर्मचारी 30-35 वर्ष की सेवा करने के उपरान्त भी पेंशन के हकदार नहीं हैं। बावजूद इसके सरकार ने पिछले 10 वर्षों में विधायकों की पेंशन में लगभग सात गुना इजाफा कर दिया है।

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