सुपर एक्सक्लूसिव: उत्तराखंड आंदोलन पर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

कमल जगाती, नैनीताल  नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य आंदोलन के दौरान एक अक्टूबर की रात राज्य आंदोलनकारियों और महिलाओं के साथ हुई बर्बता के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह […]

कमल जगाती, नैनीताल 
नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य आंदोलन के दौरान एक अक्टूबर की रात राज्य आंदोलनकारियों और महिलाओं के साथ हुई बर्बता के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को मामले में पक्षकार बनाते हुए उनसे पूछा है कि मुज्जफरनगर कांड में जिम्मेदार पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई और तमाम अदालतों में मुजफ्फरनगर कांड से संबंधित मुकदमों का स्टेटस क्या है, और उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे।
               आपको बता दें कि उत्तराखंड राज्य की अलग मांग को लेकर पूरे प्रदेश के आन्दोलनकारी दिल्ली कूच करे थे इसी दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रर्दशनकारियों को दिल्ली जाने से रोकने के आदेश दिए और पुलिस ने तत्कालीन सरकार के आदेश पर 1 अक्टूबर की रात को सभी आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर रोक लिया।
 रोके जाने से आंदोलनकारी नाराज हुए तो देखते ही देखते पुलिस ने निहत्थे आंदोलनकारियों पर फायरिंग कर दी जिसमें दर्जन भर पुरुष और महिला आंदोलकारी शहीद हो गए और सैकडों आन्दोलन कारी घायल हो गए थे।
 वहीं आन्दोलन में दिल्ली जा रही महिलाआन्दोलनकारियों के साथ दुष्कर्म भी करा गया।
 आंदोलन के दौरान दो अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा कांड में पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिलने व फायरिंग के आरोपितों पर कार्रवाई नहीं होने के मामले का हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में माना है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में हुई।

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