तो धंधा चमकाने को बने सीएम के सलाहकार ! CM के आदेश की उड़ा रहे धज्जियां

 उत्तराखंड सरकार के दो सलाहकार नवीन बलूनी k s पंवार खुद ही सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है कि उन्होंने सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू कर दी हैं।  प्राइवेट स्कूल वाले कभी कोर्ट तो कभी सरकार के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं […]

 उत्तराखंड सरकार के दो सलाहकार नवीन बलूनी k s पंवार खुद ही सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है कि उन्होंने सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू कर दी हैं।  प्राइवेट स्कूल वाले कभी कोर्ट तो कभी सरकार के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं भी राहत नहीं मिल रही है।
 दूसरी ओर मुख्यमंत्री के सलाहकार नवीन बलूनी तथा के एस पंवार के स्कूल में ही बच्चों को एनसीईआरटी की किताबों के अलावा अन्य महंगी किताबें भी थमाई जा रही है। साथ ही एनुअल फीस के नाम पर 1850 रुपए भी लिए जा रहे हैं।
 एनसीईआरटी की किताबों के साथ-साथ बच्चों को जबरदस्ती अन्य किताबों की लिस्ट भी थमाई जा रही है। इन किताबों की की कीमत ₹5000 से भी अधिक है। NCERT जी के अलावा ऐसी 22 किताबें और हैं। देहरादून स्थित सोशल बलूनी स्कूल की शिकायतों के विषय में जिला शिक्षा अधिकारी बी एस जोशी कहते हैं कि एनसीईआरटी के अलावा प्राइवेट स्कूल दूसरी किताबें बच्चों को नहीं दे सकते।
 जोशी कहते हैं कि जल्दी ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। सवाल यह है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में पहले से ही यह मामला है तो अब तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई !
 स्कूल के प्रिंसिपल पंकज नौटियाल अपने बचाव में कहते हैं कि सरकार का आदेश 2 फरवरी में जारी हुआ। जबकि उन्होंने किताबें नवंबर माह में ही मंगा ली थी। एनुअल फीस लिए जाने और जबरन एनसीईआरटी के अलावा अन्य किताबों के मामले में वह सफाई देते हैं कि उन्होंने इन दोनों मामलों में अभिभावकों पर कोई दबाव नहीं बनाया।
 अपने बचाव में  11 अप्रैल को स्कूल प्रबंधन ने जिला शिक्षा अधिकारी को एक गोलमोल पत्र भी भेजा है। जिसमें उनका कहना है कि वह सरकार के नियम का पालन करेंगे।  किंतु NCERT से इतर किताबें थमाने और जबरन एनुअल फीस लिए जाने के मामले में वह कुछ नहीं कहते।
 बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री के सलाहकार ही अपने स्कूल में सरकार के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाएंगे तो फिर सरकार के नियम कायदे किन स्कूलों के लिए बने हैं !
 जब शिक्षाविद नवीन बलूनी और उद्योगपति के एस पंवार को सलाहकार बनाया गया था, तब यह माना जा रहा था कि शिक्षा तथा उद्योग के क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को सलाहकार बनाए जाने से उत्तराखंड का काफी हित होगा किंतु सवाल यह है कि महंगी किताबें और एनुअल फीस के नाम पर अभिभावकों की जेब पर यह डाका डाले जाने से आखिर किसका हित हो रहा है !!

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