गामा का अतिक्रमण तोडऩे पर फिर ठिठका प्रशासन

आम और खास लोगों के बीच फंसा अतिक्रमण हटाओ अभियान न्यायालय के आदेश पर देहरादून में अतिक्रमण हटाओ अभियान इसलिए सवालों के घेरे में आ गया है, क्योंकि पहली बार देहरादून का आम आदमी न सिर्फ सीधा सरकार को सरकार की शिकायत कर रहा है, बल्कि बकायदा हाईकोर्ट को फोटो सहित पत्र भेजे जा रहे […]

आम और खास लोगों के बीच फंसा अतिक्रमण हटाओ अभियान

न्यायालय के आदेश पर देहरादून में अतिक्रमण हटाओ अभियान इसलिए सवालों के घेरे में आ गया है, क्योंकि पहली बार देहरादून का आम आदमी न सिर्फ सीधा सरकार को सरकार की शिकायत कर रहा है, बल्कि बकायदा हाईकोर्ट को फोटो सहित पत्र भेजे जा रहे हैं कि उनका अतिक्रमण तो हटा दिया गया, किंतु खास लोगों का छोड़ दिया गया। अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ सीलिंग की कार्यवाही में भी सरकार द्वारा भेदभाव के रवैये का आलम यह है कि यदि अब न्यायालय ने आम लोगों द्वारा की गई शिकायतों का स्वत: संज्ञान ले लिया तो सरकार के लिए एक बार फिर असहज स्थिति हो सकती है। राज्य सरकार पहले ही कोर्ट द्वारा लगातार पड़ती फटकारों से बैकफुट पर है।

देहरादून में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पहले दिन चिन्हींकरण का काम किया जा रहा है। उसके बाद लाल निशान लगाने और फिर अतिक्रमणकारी को एक दिन का समय स्वत: हटाने के लिए दिया जा रहा है। अमूमन पूरे शहर में यही स्थिति है, किंतु विगत मंगलवार को घंटाघर के समीप बीएसएनएल कार्यालय के बाहर, जहां पर मुख्यमंत्री के खास सुनील उनियाल गामा की दो दुकानें हैं, वहां लाल निशान लगाने में ही पहले काफी समय लग गया। ३.३ मीटर के लाल निशान लगने के बाद सुनील उनियाल गामा और शेष दुकानदारों ने प्रशासन से सिर्फ दो दिन का समय अतिक्रमण हटाने के लिए मांगा था, किंतु एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की टीम सुनील उनियाल गामा के दबाव में मौन है। विगत तीन दिनों से देहरादून के नेहरू कालोनी से रिंग रोड क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को चिन्हींकरण के बाद लोग स्वत: ध्वस्त कर रहे हैं।

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एक मंजिला दुकान से लेकर तीन मंजिला मकान और शॉपिंग कॉम्पलेक्स सरकार के आदेश पर लोग स्वत: ही तोड़ रहे हैं। एक ओर लोगों को कानून का इतना डर है कि वे अपने आप आगे बढ़कर सरकार का हाथ बंटा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के प्रभावशाली लोग सत्ता की धमक में प्रशासन को काम नहीं करने दे रहे हैं।


सूत्रों के अनुसार सुनील उनियाल गामा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मांग कर चुके हैं कि उनकी दुकान को उजाडऩे के एवज में उन्हें नई दुकान दी जाए। अब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के एवज में यदि त्रिवेंद्र रावत इसी तरह दुकानें बांटने लग जाएं तो उन्हें अकेले देहरादून में दो हजार से अधिक दुकानें बनानी पड़ेंगी। देखना है कि सुनील उनियाल गामा का यह दबाव किस हद तक काम करता है और कब अतिक्रमण हटाओ दस्ता गामा के अवैध अतिक्रमण को हटाने की हिम्मत जुटाता है।

 

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