गुड न्यूज:एक माह बाद खुली नैनीताल की माॅल रोड

कमल जगाती, नैनीताल उत्तराखण्ड के नैनीताल की प्रतिष्ठित मॉल रोड को आज लगभग एक महीने के बाद रिक्शा, मोटरसाइकिल और हलके वाहनों के लिए दोबारा खोल दिया गया है। देखिए वीडियो   https://youtu.be/MHdjJBuB9AE जिला प्रशासन ने दिन रात एक करके माहभर बाद मॉल रोड को चलने योग्य बना दिया है। नैनीताल की सुन्दर मॉल रोड […]

कमल जगाती, नैनीताल

उत्तराखण्ड के नैनीताल की प्रतिष्ठित मॉल रोड को आज लगभग एक महीने के बाद रिक्शा, मोटरसाइकिल और हलके वाहनों के लिए दोबारा खोल दिया गया है।

देखिए वीडियो  

https://youtu.be/MHdjJBuB9AE

जिला प्रशासन ने दिन रात एक करके माहभर बाद मॉल रोड को चलने योग्य बना दिया है। नैनीताल की सुन्दर मॉल रोड का एक हिस्सा बीती 18 अगस्त की शाम टूटकर नैनीझील में समा गया था। तब से अगले 15 दिनों तक झील में मॉलरोड के बचे हुए हिस्से को समाने से बचाने या बनाने के लिए कोई कार्यवाहीं नहीं हुई थी। इसका एक कारण, तय ठेकेदार को किसी ठोस कागजों के बगैर कार्य करने की बंदिश बताया जा गया था । बीती 25 अगस्त की शाम मॉल रोड का दस फ़ीट x आठ फ़ीट(10×8) का एक और हिस्सा टूटकर नैनीझील में समा गया था। इसके बाद से ही जिलाधिकारी और दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों ने क्षेत्र के कई दौरे किये। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँच गए और निर्णय लिया गया की पहले नैनीझील में घुसकर जिओ बैग डाले जाएं जिससे कि पानी सड़क का आगे का हिस्सा ना काट सके। इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए नैपाली और पहाड़ी श्रमिकों को रस्सी से बांधकर झील में उतारा गया। कट्टों में निहाल नाले की मिट्टी भरकर इसे झील में डाला गया, जिससे पानी टाइट हिस्से में मार करने में असमर्थ रहे। उस दौरान नैनीझील के जून के जलस्तर के अनुपात में लगभग 26 फ़ीट की बढ़ोतरी हुई थी। झील के इस टूटे हिस्से की गहराई भी काफी ज्यादा बताई गई। प्रशासन ने टेंडर निकालकर कास्ट आयरन के पोल लगाने की तैयारी की, इसके बाद इन यहाँ जिओ बागों को तार से बांधकर उतारा गया। सड़क का लैवल पहुँचने पर सड़क के दोनों तरफ 125 x 65 मिलीमीटर के गार्डर बोल्ट से कसे गए। इसके बाद बीच सड़क पर गड्ढे कर गार्डर को कॉलम के रूप में गाड़ा गया। सड़क में टूटे हिस्से की लम्बाई के अनुसार गार्डर को 38 मीटर तक जोड़कर लंबा किया गया। इन्हें दोनों तरफ लगाया गया और चार चार फीट पर टाई किया गया। बाद में इसके ऊपर मट्टी डालकर चलने योग्य बनाया।

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