यूथ आइकाॅन ढाई दशक का शानदार सफर

यूथ आइकाॅन अवार्ड की आधारशिला ढाई दशक पहले शशि भूषण मैठाणी “पारस“ ने रखी थी। कहते हैं फलदार पेड़ दोहरी खुशी और फायदा देता है। लगाने वाले को भी और इसका उपभोग करने वालों को भी। आज से ढाई दशक पहले पहाड़ के एक विचारशील युवक द्वारा लगाया गया एक पौधा आज फलों से लकदक […]

यूथ आइकाॅन अवार्ड की आधारशिला ढाई दशक पहले शशि भूषण मैठाणी “पारस“ ने रखी थी। कहते हैं फलदार पेड़ दोहरी खुशी और फायदा देता है। लगाने वाले को भी और इसका उपभोग करने वालों को भी। आज से ढाई दशक पहले पहाड़ के एक विचारशील युवक द्वारा लगाया गया एक पौधा आज फलों से लकदक एक पेड़ बन चुका है। शशिभूषण मैठाणी ने 1992 में प्रदेश के बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया था। उन बच्चों को पहाड़ के गांवों की गुमनामी से शहर और देश के फलक तक पहुंचाने की पहल की थी।

शशिभूषण मैठाणी ने ’प्रतिभा प्रदर्शन’ के नाम से एक पुरस्कार शुरू किया। उन्होंने पहाड़ के विभिन्न विद्यालयों में कला, निबन्ध और मेहंदी आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करनी आरंभ कीं और इसमें अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया। अनेक संघर्षों का सामना करते हुए श्री मैठाणी ने कभी इस क्रम को नहीं तोड़ा। कुछ ही वर्षों मंे इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। पहाड़ की एक से बढ़कर प्रतिभाएं उजागर होने लगीं। प्रतिभागियों का इससे बहुत उत्साहवर्द्धन हुआ।


1995 में कुछ बुद्धिजीवी लोगों के सुझाव पर उन्होंने इस पुरस्कार नाम बदलकर ’कला प्रदर्शन-प्रतिभा दर्शन’ कर दिया। 2007 तक अनेक विद्यालयों में जाकर श्री मैठाणी इस प्रेरणात्मक कार्य को करते रहे।
इस बीच कुछ साहित्यकारों, कलाकारों ने उन्हें सुझाव दिया कि न केवल विद्यार्थियों, बल्कि पहाड़ में गुमनामी में जी रही कला, संस्कृति, साहित्य, गायन, अभिनय प्रतिभाओं को भी सामने लाने की आवश्यकता है। इससे न केवल इन लोगों की कला को सम्मान मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड का नाम देश-दुनिया में प्रसिद्ध होगा। इस अच्छे सुझाव पर तत्काल कार्य करते हुए श्री मैठाणी ने 2008 में इस पुरस्कार का नाम ’यूथ आइकाॅन नेशनल अवार्ड’ कर दिया।
तब से यह पुरस्कार राज्य के उन लोगों को दिया जाता है, जो लोगों के लिए प्रेरणापुंज हैं, जो अभिनय, कला, साहित्य लेखन, गीत-संगीत, संस्कृति, खेल, चिकित्सा, शिक्षा, पत्रकारिता के क्षेत्र, में श्रेष्ठ कार्य करते हैं। 2008 से इस पुरस्कार की यात्रा निर्बाध गति से चल रही है। सालोंसाल इसकी जड़ें मजबूत हो रही हैं और शाखाएं फैल रही हैं। राज्य का यह विशिष्ट पुरस्कार लोकप्रियता की बुलंदियां छू रहा है।
शशिभूषण मैठाणी के अनुसार इस पुरस्कार का आयोजन मेरे अकेले के बूते नहीं है। इस पुनीत कार्य में मेरे मित्र और अनेक सहयोगी खड़े रहते हैं। इस महायज्ञ में अनेक आहुतियां पड़ती हैं। कुछ लोग आर्थिक सहायता करते हैं तो कुछ व्यवस्था बनाने में योगदान देते हैं। ऐसे राज्य और समाजप्रेमी इन लोगों की सहायता से इस पुरस्कार का सफर लंबा होता जाएगा।

निष्पक्षता है इसकी विशेषता
निष्पक्षता से चयन इस पुरस्कार की एक विशेषता है। इस कारण इसकी प्रतिष्ठा न केवल राज्य, बल्कि देश तक पहुंच गई है। राजनीति, पत्रकारिता, साहित्य, संगीत, फिल्म, खेल जगत की अनेक नामचीन हस्तियां अब तक इस पुरस्कार के भव्य समारोहों की साक्षी बन चुकी हैं। इस पुरस्कार को पाने वाली प्रतिभाएं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती हैं। श्री मैठाणी पुरस्कार देने से पहले किसी प्रतिभा के विषय में लंबे समय तक बारीकी से पड़ताल और परीक्षण करते हैं, फिर संबंधित क्षेत्र की कुछ बड़ी हस्तियों से भी उस पर सुझाव लेते हैं। तब जाकर वे पुरस्कार के लिए प्रतिभा का चयन करते हैं। कई बार तो जब आयोजक पुरस्कार के लिए चयनित प्रतिभा को फोन कर इसकी सूचना देते हैं तो प्रतिभा को इस पर आश्चर्य होता है अथवा यकीन ही नहीं होता। वह क्षण बड़ा महत्त्वपूर्ण होता है आयोजकों के लिए भी और प्रतिभा के लिए भी।

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