ब्रिटिश काल में बने श्री बद्रीनाथ मन्दिर एक्ट को हिन्दू विरोधी बताते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार व अन्य पक्षों से मांगा जबाव

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- उतराखण्ड उच्च न्यायालय ने ब्रिटिश काल के 1939 में बने श्री बद्रीनाथ मन्दिर एक्ट को हिन्दू विरोधी बताते हुए इस एक्ट में संशोधन की मांग संबंधी जनहित याचिका में सरकार व अन्य पक्षों से 8 हफ्ते के भीतर जबाव देने देने को कहा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति […]

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-

उतराखण्ड उच्च न्यायालय ने ब्रिटिश काल के 1939 में बने श्री बद्रीनाथ मन्दिर एक्ट को हिन्दू विरोधी बताते हुए इस एक्ट में संशोधन की मांग संबंधी जनहित याचिका में सरकार व अन्य पक्षों से 8 हफ्ते के भीतर जबाव देने देने को कहा है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आर.सी.खुल्बे की खंडपीठ ने रामनगर निवासी अरविंद कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई की ।

याचिका में कहा गया है कि 1939 में ब्रिटिश सरकार ने हिन्दू धर्म की मान्यताओं को नष्ट करने के लिये श्री बद्रीनाथ मन्दिर एक्ट बनाकर उसमें कई हिन्दू विरोधी प्रावधान जोड़े । लेकिन देश की आजादी के बाद नया संविधान बन गया । संविधान के अनुच्छेद 25 व 26 में धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई । लेकिन 1939 के इस एक्ट में संविधान के मुताबिक संशोधन नहीं किया गया ।

सरकार ने अपने हित के लिये पिछले वर्षों में चारधाम देवस्थानम बोर्ड नाम से नया कानून बनाया, लेकिन इस एक्ट के प्रावधानों में संशोधन नहीं किया गया। हालांकि यह देवस्थानम बोर्ड नाम से बना कानून निरस्त करना पड़ा ।

ऐसे मामलों में अन्य राज्यों ने हस्तक्षेप करके वहाँ ट्रस्ट घोषित कर दिए, लेकिन उत्तराखण्ड सरकार ने इसे अपनी आय का साधन मान लिया है । सरकार ने चारधाम को एक ट्यूरिस्ट प्लेस बनाया जा रहा है जबकि सरकार का कार्य है कि वहां सुख सुविधाएं उपलब्ध कराना । वर्तमान में भी सरकार 1939 के एक्ट को बरकरार रखना चाह रही है । सरकार ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड एक्ट को तो वापस लिया लेकिन 1939 के इस अंग्रेजो के एक्ट में संसोधन नहीं किया है।

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