फर्जी एफडीआर पर दे दिए करोड़ों के ठेके

ठेकेदारों से निविदा शुल्क नहीं लिया गया। धरोहर राशि के लिये अवैध एफडीआर वैध मान लिये गये। नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किये जाने की अनिवार्यता ताक पर रख दी गई। निविदा में फर्म का निर्धारित टर्नओवर की अनदेखी की गई। ये वो अनयिमिततायें है जो हरिद्वार कुंभ के निर्माण कार्यों के टेंडर में बरती गई हैं। […]

ठेकेदारों से निविदा शुल्क नहीं लिया गया। धरोहर राशि के लिये अवैध एफडीआर वैध मान लिये गये। नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किये जाने की अनिवार्यता ताक पर रख दी गई। निविदा में फर्म का निर्धारित टर्नओवर की अनदेखी की गई। ये वो अनयिमिततायें है जो हरिद्वार कुंभ के निर्माण कार्यों के टेंडर में बरती गई हैं। सिंचाई विभाग के अफसरों ने निविदा प्रक्रिया में अपने चहेते ठेकेदारों को ठेका देने के लिये ये धांधली की है, जिससे सरकार को करोड़ों के नुकसान का अनुमान है। सिंचाई मंत्री, मुख्य सचिव के साथ ही मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पार्टल में भी की गई पर नतीजा सिफर निकला।
शिकायत में कहा गया है कि सिंचाई विभाग ने कुंभ क्षेत्र में कांवड़ पटरी (18 करोड़) और स्नान घाट (9 करोड़) के निर्माण के टेंडर अलग-अलग जॉब्स में आमंत्रित किये। निविदा समिति ने टेंडर के नियम ताक पर रख दिये। टेंडरों में लगे दस्तावेजों की जांच किये बगैर मनमाने तरीके से उन ठेकेदारों को टेक्निकल बिड में पास कर दिया जो विभागीय अधिकारियों के चहेते हैं। बाकी ठेकेदारों को कारण बताये बगैर बिड से बाहर कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जिन ठेकेदारों को को टेक्निकल बिड में पास किया गया वे निविदा के लिये रखी गई आवश्यक व अनिवार्य शर्तों को भी पूरा नहीं करते थे। इस मामले में अधीक्षण अभियंता शरद श्रीवास्तव और अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम की भूमिका सवालों के घेरे में बताई जा रही है।

धरोहर राशि के लिये लगाया अवैध एफडीआर

देहरादून। कांवड़ पटरी का एक टेंडर मैसर्स जिन्दल ट्रेडर्स को आवंटित किया गया जबकि इस फर्म ने न तो नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा किया था और धरोहर राशि के लिये इसकी ओर से जमा किये गये एफडीआर में से एक की वैधता 25 सितम्बर 2017 व दूसरे की 3 अक्टूबर 2018 थी, जबकि यह वैधता 25 मार्च 2020 तक होनी चाहिये थी।

टर्नओवर का नियम भी रखा ताक पर 

देहरादून। कांवड़ पटरी का ही एक टेंडर निकुंज कुमार गुप्ता के नाम पर आवंटित हुआ। टेंडर शर्त के अनुतार पिछले तीन वर्ष में ठेकेदार का टर्नओवर 150 लाख होना चाहिये था जबकि निकुंज कुमार गुप्ता का टर्नओरवर मात्र 101.54 लाख है।

इन फर्मों को मिला नियम विरुद्ध टेंडर 

मैसर्स जिन्दल ट्रेडर्स। निकुंज कुमार गुप्ता। भारद्वाज एण्टरप्राइजेज। केके एण्टरप्राइजेज।

‘‘कुंभ निर्माण कार्यों में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मामले की जांच करवाई जायेगी।”

_ सतपाल महाराज, सिंचाई मंत्री

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