निकाय चुनाव : महिला मेयर प्रत्याशी सुलोचना को मिल अपार जनसमर्थन। प्रचार प्रसार में जुटे कई गठबंधन.

देहरादून नगर निगम के चुनाव में एकमात्र महिला प्रत्याशी सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल को सामान्य सीट पर महिला एकमात्र महिला उम्मीदवार होने के चलते महिलाओं का खासा जन समर्थन मिल रहा है। सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल के पक्ष में समर्थन देकर उन्हे लगभग आधा दर्जन राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अपना एक गठबंधन बनाकर संयुक्त […]

देहरादून नगर निगम के चुनाव में एकमात्र महिला प्रत्याशी सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल को सामान्य सीट पर महिला एकमात्र महिला उम्मीदवार होने के चलते महिलाओं का खासा जन समर्थन मिल रहा है।
सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल के पक्ष में समर्थन देकर उन्हे लगभग आधा दर्जन राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अपना एक गठबंधन बनाकर संयुक्त प्रत्याशी बनाया है।
ऊर्जा यानी उत्तराखंड राज्य जॉइंट एलायंस के नाम से बने इस गठबंधन के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल के साथ चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
ऊर्जा के संयोजक प्रांजल नौडियाल कहते हैं कि नगर निगम की मेयर प्रत्याशी सुलोचना ईष्टवाल का चुनाव चिन्ह पंखा है और महिलाएं तथा पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में स्वत स्फूर्त ढंग से चुनाव प्रचार में जुट रहे हैं।
सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल के पिता आर्मी में पूर्व कैप्टन रहे हैं और उनके ससुर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
सुलोचना ईष्टवाल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित संगठन से भी जुड़ी हुई हैं।
बड़ी संख्या में गौरव सेनानी संगठन और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन के कार्यकर्ता भी सुलोचना ईष्टवाल खंकरियाल के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
बड़ी संख्या में महिलाओं का जुटना अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी हैरान कर देने वाला है।
राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं पर अत्याचार से लेकर बेरोजगारी , मूल निवास और भू कानून तथा कर्मचारियों के शोषण को लेकर प्रत्येक संघर्ष में सुलोचना ईष्टवाल सदैव बराबर की भागीदार रही हैं। यही कारण है कि इस बार तमाम जन संगठन सुलोचना ईष्टवाल को अपना समर्थन दे रहे हैं।
नगर निगम मेयर प्रत्याशी सुलोचना ईष्टवाल ने कहा कि नगर निगम में अब तक लगातार भाजपा और कांग्रेस की ही सरकारें रही है लेकिन देहरादून में नगर निगम की जमीनों पर अवैध कब्जों से लेकर तमाम भ्रष्टाचार और बिजली पानी सड़क की समस्याएं और भी ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए इन समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से तमाम क्षेत्रीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने उनको अपना संयुक्त प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है।

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