Rupee vs Dollar: अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया। जानें 3 बड़ी वजहें

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपये में शुक्रवार (27 मार्च) को भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही रुपया 28 पैसे टूटकर ₹94.24 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया था । अब अंतर-दिवसीय कारोबार में रुपया […]

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल और मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय रुपये में शुक्रवार (27 मार्च) को भारी गिरावट दर्ज की गई।

शुरुआती कारोबार में ही रुपया 28 पैसे टूटकर ₹94.24 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया था ।

अब अंतर-दिवसीय कारोबार में रुपया 74 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.70 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर दर्ज किया गया।

पहले के रिकॉर्ड को भी तोड़ा

इससे पहले इसी सप्ताह रुपया ₹93.98 के स्तर पर बंद हुआ था, लेकिन शुक्रवार को उसने यह रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

पिछले महीने से अब तक रुपये में करीब लगभग 4% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

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मिडिल-ईस्ट संकट का सीधा असर

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है।

निवेशकों को डर है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा संकट आ सकता है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में डॉलर महंगा होने से रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।

क्यों टूट रहा है रुपया? जानें 3 बड़ी वजहें

  • ईरान युद्ध का गहराता संकट

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। भारत 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

  • डॉलर की बढ़ती डिमांड

अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।
डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये जैसी करेंसी कमजोर होती है।

  • शेयर बाजार में गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 1% से ज्यादा टूटे।

विदेशी निवेशक (FIIs) पैसा निकाल रहे हैं, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ रहा है।

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आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर मिडिल-ईस्ट में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो रुपये पर और दबाव पड़ सकता है।

आने वाले दिनों में मुद्रा बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर करेगी।

रुपये में आई यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों का नतीजा है। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों दोनों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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