बड़ी खबर : अगर पटवारी ने लटकाया प्रमाण पत्र बनाने का काम तो होगी दंडात्मक कार्यवाही

हल्द्वानी  विशाल सक्सेना  जन्म-मृत्यु, स्थाई निवास, जातिप्रमण पत्र, ईडब्ल्यूएस जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों को बनाने के लिए तहसील के चप्पल घिस रहे फरियादियों के लिए अच्छी खबर है। यदि अब पटवारी ने प्रमाणपत्र बनाने का काम लटकाया तो उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। यही नहीं जिला प्रशासन ने पटवारी को नोटिस भी दिया है। […]

हल्द्वानी 

विशाल सक्सेना 

जन्म-मृत्यु, स्थाई निवास, जातिप्रमण पत्र, ईडब्ल्यूएस जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों को बनाने के लिए तहसील के चप्पल घिस रहे फरियादियों के लिए अच्छी खबर है।

यदि अब पटवारी ने प्रमाणपत्र बनाने का काम लटकाया तो उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। यही नहीं जिला प्रशासन ने पटवारी को नोटिस भी दिया है।

जिलाधिकारी नैनीताल महोदय के पत्र संख्या-358/सात स०भू०अ०/2024 दिनाकं 30 अप्रैल 2024 द्वारा निदेर्शित किया गया है कि वर्तमान में सेवा के अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत जारी होने वाले विभिन्न प्रमाण पत्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में संग्रह अमीनों द्वारा आख्या प्रेषित की जा रही थी, संगह अमीनों द्वारा प्रान्तीय संघ के आहवान पर एंव राजस्व परिषद उत्तराखण्ड देहरादून द्वारा अमीनों से वसूली से अतिरिक्त अन्य कार्य न लिये जाने के निर्देश के क्रम में अमीन संघ द्वारा दिनांक 25.04.2024 से प्रमाण पत्रों पर आख्या देने का बहिष्कार किये जाने के कारण, समस्त राजस्व उपनिरीक्षकों से प्रमाण पत्रों पर जांच आख्या प्राप्त की जाये और साथ ही राजस्व उप निरीक्षको को सहयोग के रूप में 01 पी० आर० डी० की तैनाती किये जाने का आश्वासन भी दिया गया है यदि किसी राजस्व उप निरीक्षक द्वारा सेवा के अधिकार अधिनियम से सम्बन्धित प्रमाण पत्रों पर आख्या प्रेषित नही की जाती तो उसके विरूद्ध कर्मचारी आचरण नियमावली में दिये गये प्रावधानों के अनुसार उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये निर्देशो की अवहेलना मानते हुये कठोर कार्यवाही अमल में लायी जाये

आपको निर्देशित किया जाता है कि जिलाधिकारी महोदय द्वारा उक्त पत्र में दिये गये निर्देशानुसार सेवा के अधिकार अधिनियम 2005 के अर्न्तगत दिनाकं 26.04.2024 से प्राप्त होने वाले समस्त प्रमाण पत्रों में ससमय आख्या न देने एवं प्रमाण पत्रों के लम्बित होने की दशा में सेवा के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत बतौर पदभिहित अधिकारी आपके विरूद्ध शास्ति अध्यारोपित कर दी जायेगी साथ ही यह समझा जायेगा कि आप उच्चाधिकारियो द्वारा दिये गये निर्देशों का अनुपालन नही कर रहे है। ऐसी स्थिति में आपके विरूद्ध नियमानुसार कठोर दण्डात्मक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी जिसका पूर्ण उत्तरादायित्व आपका होगा।

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