बड़ी खबर: बर्खास्त कार्मिकों के समर्थन में 48 घंटे का उपवास हुआ खत्म, बुद्धि शुद्धि यज्ञ कर बहाली की मांग

देहरादून- उत्तराखंड विधानसभा से बर्खास्त कार्मिकों को विधानसभा के बाहर धरना प्रदर्शन करते हुए 89 दिन गुजर चुके हैं इस बीच कार्मिकों ने हर वो प्रयत्न किए जिससे विधान सभा सचिवालय व सरकार उनकी जायज मांग को स्वीकार कर उनकी पुनः बहाली कर सके| शुक्रवार को कार्मिकों के समर्थन देने के लिए धरनास्थल पर बैठे […]

देहरादून- उत्तराखंड विधानसभा से बर्खास्त कार्मिकों को विधानसभा के बाहर धरना प्रदर्शन करते हुए 89 दिन गुजर चुके हैं इस बीच कार्मिकों ने हर वो प्रयत्न किए जिससे विधान सभा सचिवालय व सरकार उनकी जायज मांग को स्वीकार कर उनकी पुनः बहाली कर सके| शुक्रवार को कार्मिकों के समर्थन देने के लिए धरनास्थल पर बैठे उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के अध्यक्ष रमेश चंद पांडे के 48 घंटे के सांकेतिक उपवास को समाप्त किया गया|

 रमेश चंद्र पांडे का कहना है कि अभी केवल सांकेतिक उपवास रखकर विधानसभा एवं सरकार को चेतावनी दी गई है इसके बावजूद भी कर्मचारियों की बहाली नहीं होती है तो वो पूरे दल बल के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे इसके साथ ही सभी कार्मिक संगठनों के बैनर तले आंदोलन को उग्र कर कार्मिकों को न्याय दिलाने का काम करेंगे|

बता दें कि 15 मार्च को पूर्वाहन 11बजे से बर्खास्त कार्मिकों के समर्थन में उत्तराखंड एकता मंच के अध्यक्ष  रमेश चंद्र पांडे सहित दो महिला कार्मिक कविता फर्त्याल व सरोज कठैत एक अखंड दीप प्रज्वलित कर उपवास पर बैठे थे, इस बीच उपवास पर बैठी महिला कार्मिक सरस्वती कठैत का स्वास्थ्य भी बिगड़ा| गुरुवार को प्रशासन द्वारा धरना स्थल पर मेडिकल टीम भी भेजी गई, मेडिकल टीम द्वारा रमेश पांडे एवं अन्य महिला कार्मिकों का स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया साथ ही हिदायत दी गई कि अगर कार्मिकों के स्वास्थ्य में और गिरावट दर्ज की गई तो चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ेगा| शुक्रवार को 11 बजे पूर्वाहन में 48 घंटे पूरे होने पर उपवास पर बैठे सभी लोगों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म की गई| इस बीच कार्मिकों के द्वारा धरना स्थल पर बुद्धि शुद्धि यज्ञ किया गया जिससे सरकार व विधानसभा अध्यक्ष कार्मिकों की न्याय की गुहार को सुन सके|

इस दौरान कार्मिकों को संबोधित करते हुए श्री पांडे ने कहा कि जब वर्ष 2001 से वर्ष 2022 तक नियुक्ति एक ही प्रक्रिया के तहत सभी 396 नियुक्तियां की है तो बर्खास्तगी केवल 228 की क्यों की गई, इसमें अनुच्छेद 14 का सरासर उल्लंघन किया गया है।जनहित में लोगों को नौकरियां दी जाती थी जबकि विधानसभा द्वारा जनहित में 228 परिवारों का निवाला छीनने का काम किया गया है| कहने में कोई गुरेज नहीं कि कार्मिकों के साथ इनके परिवारों एवं बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। 

 इस दौरान सुशील, पूनम अधिकारी, पंकज धोनी, शिवराज सिंह धानक, कपिल धोनी कौशिक भैसोड़ा, प्रदीप सिंह, आशीष शर्मा, अक्षत शर्मा, केदार सिंह, विजय चौहान, राजकिशोर आदि समस्त बर्खास्त कार्मिक उपस्थित थे|

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