- 7.20 लाख श्रद्धालु पहुंचे, बढ़ी आमदनी और भीड़ के बीच जानकीचट्टी–यमुनोत्री मार्ग की बदहाली बनी चुनौती
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
बड़कोट/उत्तरकाशी, 19 सितंबर।
यमुनोत्री धाम में इस यात्रा सीजन श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड आमद के साथ मंदिर समिति की आय भी करीब 60 लाख रुपये तक पहुंच गई है। 18 सितंबर तक दानपात्र, रसीद बुक और अन्य माध्यमों से हुई आय के आंकड़े जहां मंदिर समिति की आर्थिक स्थिति मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ती श्रद्धालु संख्या के अनुरूप धाम और यात्रा मार्ग की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल और उपाध्यक्ष संजीव उनियाल ‘गुड्डू’ के अनुसार इस बार यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या और समिति की आय, दोनों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अब तक करीब 7.20 लाख श्रद्धालु यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा सीजन आगे बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है।
आय बढ़ी तो सुविधाओं का सवाल भी बड़ा
यमुनोत्री धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालु आमद ने यात्रा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि जब हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और मंदिर समिति की आय में भी वृद्धि हो रही है, तो उसी अनुपात में यात्री सुविधाओं, पैदल मार्ग, सुरक्षा और पड़ावों की व्यवस्थाओं को कितना मजबूत किया जा रहा है।
यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से रौनक जरूर लौट आई है। कारोबारियों और स्थानीय लोगों के चेहरों पर भी यात्राकाल की चहल-पहल दिखाई दे रही है, लेकिन इस रौनक के पीछे यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षित यात्रा की चुनौती भी मौजूद है।
जानकीचट्टी से धाम तक बढ़ रहा दबाव
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यात्रा का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक की व्यवस्थाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करना जरूरी हो गया है। पैदल मार्ग की स्थिति और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सुधार की आवश्यकता बताई जा रही है।
यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच रास्ते में विश्राम, पेयजल, शौचालय, चिकित्सा सहायता, साफ-सफाई और आपातकालीन व्यवस्थाएं कितनी पर्याप्त हैं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और अस्वस्थ यात्रियों के लिए लंबी पैदल यात्रा के दौरान सुविधाओं की उपलब्धता अहम हो जाती है।
यमुनोत्री हाईवे के डेंजर जोन बढ़ा रहे चिंता
दूसरी ओर यमुनोत्री हाईवे की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है और कुछ हिस्से डेंजर जोन में तब्दील हो चुके हैं। यात्रा सीजन में वाहनों और श्रद्धालुओं का दबाव बढ़ने के कारण ऐसे स्थानों पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
यात्रियों की संख्या का रिकॉर्ड बनना निश्चित रूप से यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, लेकिन यह आंकड़ा प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने व्यवस्थाओं को उसी गति से विस्तार देने की चुनौती भी रखता है। केवल श्रद्धालुओं की संख्या और आय का रिकॉर्ड बनना पर्याप्त नहीं माना जा सकता; सुरक्षित मार्ग और बेहतर यात्री सुविधाएं भी यात्रा की सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना हैं।
रिकॉर्ड आमदनी के साथ जवाबदेही भी जरूरी
यमुनोत्री धाम में करीब 60 लाख रुपये की आय और 7.20 लाख श्रद्धालुओं की आमद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि धाम की बढ़ती आय और बढ़ती भीड़ के अनुपात में व्यवस्थाओं में कितना सुधार हुआ है। मंदिर समिति और संबंधित विभागों को आय के उपयोग, यात्री सुविधाओं के विस्तार तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पारदर्शी जानकारी सामने रखनी चाहिए।
यात्रा का बढ़ता दबाव आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। ऐसे में अभी से जानकीचट्टी–यमुनोत्री पैदल मार्ग, हाईवे के संवेदनशील हिस्सों, यात्री सुविधाओं और आपदा प्रबंधन को लेकर ठोस दीर्घकालिक योजना तैयार करना जरूरी होगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या यमुनोत्री की आस्था और लोकप्रियता का प्रमाण है, लेकिन इस आस्था की यात्रा सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।


