छह माह बाद राममंदिर शुरू :बोले विश्व हिंदु परिषद के अध्यक्ष

छह महीने बाद बनना शुरु हो जाएगा अयोध्या का राममंदिर कुमार दुष्यंत हरिद्वार।विश्व हिंदु परिषद के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे का दावा है कि आने वाले छह महिनों में अयोध्या में विहिप के प्रस्तावित एवं बहुप्रतिक्षिित राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।उनका यह भी कहना है कि केंद्र सरकार […]

छह महीने बाद बनना शुरु हो जाएगा अयोध्या का राममंदिर

कुमार दुष्यंत
हरिद्वार।विश्व हिंदु परिषद के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश विष्णु सदाशिव कोकजे का दावा है कि आने वाले छह महिनों में अयोध्या में विहिप के प्रस्तावित एवं बहुप्रतिक्षिित राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।उनका यह भी कहना है कि केंद्र सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है।शीघ्र ही केंद्र सरकार के चार साल के कामों के अच्छे परिणाम देश की जनता के सामने होंगे।कोकजे विहिप अध्यक्ष चुने जाने के बाद आज गंगा पूजन के लिए हरिद्वार पहुंचे थे।

 

विहिप अध्यक्ष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में समान कानून, सामाजिक समरसता, गोहत्या पर रोक, गोवंश संरक्षण, नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाना विहिप के एजेंडे में शामिल है।और हम इसके लिए काम करते रहेंगे।हिंदुवादी संगठनों के अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक आबादी असंतुलन के लिए हिंदुओं को आबादी बढाने के सुझाव को खारिज करते हुए कोकजे ने कहा कि यह नितांत निजी विषय है कि कौन कितने बच्चे करे।हां यदि कोई परिवार भरण-पोषण में सक्षम है तो उसे बच्चे दो ही अच्छे की अवधारणा से निकलना चाहिए।

केंद्र में प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार के बावजूद राममंदिर निर्माण की अनिश्चितता के ‘पर्वतजन’ के सवाल पर कोकजे ने कहा कि संविधान का पालन करना हर भारतीय का धर्म है।हम भी उसी धर्म का पालन कर रहे हैं।मामला सर्वोच्च न्यायालय में है।अबतक मंदिर निर्माण के पक्ष में  पंद्रह हजार से अधिक दस्तावेज माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किये जा चुके हैं।जिसके बाद हमें उम्मीद है कि अगले छह महीनों में इस विवाद का समापन हो जाएगा।व अयोध्या में करोडों हिंदुओं की भावनाओं के अनुरुप भव्य राममंदिर निर्माण का कार्य आरंभ हो जाएगा।

विश्व हिंदू परिषद के इस नवनियुक्त अध्यक्ष के बयान पर धर्मनिरपेक्ष लोग कड़ी टिप्पणी करने लगे हैं लोग सवाल उठा रहे हैं कि कोकजे के कार्यकाल के निर्णय निर्णय ही रहे होंगे?   न्याय कैसे , जब वे एक धर्म को मनाने वाले एक आक्रमक संगठन के मुखिया बने हैं। न्यायाधीश संविधान की शपथ लेता है। जो कि धर्मनिरपेक्ष है।

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