बाथरूम मे रेत की बोतल का ड्रामा और लीकेज पर कंट्रोल नही

गिरीश गैरोला जल संकट से जूझ रहे देश और प्रदेश में पानी बचाने की मुहिम के तहत कई योजनाओं पर काम हो रहा है। जिसमे वर्षा के जल को संचय करने, प्राकृतिक जल स्रोतों को रिचार्ज करने करने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। इन्ही प्रयासों के बीच घरों में पानी की  बचत […]

गिरीश गैरोला
जल संकट से जूझ रहे देश और प्रदेश में पानी बचाने की मुहिम के तहत कई योजनाओं पर काम हो रहा है। जिसमे वर्षा के जल को संचय करने, प्राकृतिक जल स्रोतों को रिचार्ज करने करने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। इन्ही प्रयासों के बीच घरों में पानी की  बचत करने के लिए बाथरूम में पानी की सिस्टर्न में रेत से भरी बॉटल डालकर हर फ्लश में एक लीटर पानी बचाने का दावा किया जा रहा है। किंतु जल संस्थान की लाइन से शुद्धिकरण के बाद लीकेज से बेकार हो रहे पानी को रोकने में विभाग की दिलचस्पी कहीं नजर नही आ रही है। किंतु उत्तरकाशी के जोशियाड़ा मोटर पुल के दोनों तरफ लीकेज से हो रहे शुद्ध पीने के पानी को विभाग के अधिकारी पाइप में भारी हवा को बाहर निकलने के लिए जरूरी होने का तर्क देकर दामन बचा रहे हैं, जबकि मौके पर साफ देखा जा सकता है कि पानी लीकेज हो रहा है न कि हवा पास होने के लिए योजना के तहत पानी गिराया जा रहा है।
उत्तरकाशी से ज्ञानसू जाने वाली गोफ़ियारा पेयजल लाइन से ताम्बाखाणी के पास से जोशियाड़ा के लिए  करीब 65 एमएम की लाइन दी गयी है, जो एलआईसी बिल्डिंग तक लोगों के हलक तर करती है। किंतु विगत एक महीने से जोशियाड़ा मोटर पुल के दोनों तरफ से पानी की लाइन में लीकेज से पानी की बड़ी बौछार झील में मिल रही है और शुद्धिकरण में खर्च लाखों रुपये  यूं ही झील में गिर कर बर्बाद हो रहे हैं।
 पानी की इस लीकेज से पहले से ही जर्जर इस  मोटर पुल का लोहा भी धीरे धीरे जंग खाकर नष्ट हो रहा है , जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकता है। इस पुल के दोनों तरफ जर्जर हो चुके पुल से एक समय मे एक ही वाहन गुजारने के लिए दो पुलिस कर्मी भी तैनात रहते हैं। किन्तु पानी की आवाजाही के समय सुबह स्याम यहाँ कोई नही रहता। इसलिए ये किसी की नजर में नही आ पाता। जोशियाड़ा के लोगों ने इस लीकेज की जानकारी पर्वतजन को दी तो हमारी टीम मौके पर पहुंची।
गौरतलब है कि लोगों ने पानी की किल्लत को लेकर कई बार विभाग  से शिकायत की किन्तु कोई असर नही हुआ। हां जनपद में पानी की कमी को लेकर विभाग चिंतित जरूर नजर आता है।
बताते चलें कि वर्ष 1985 -86 में जल निगम जोशियाड़ा की आबादी के लिए एक टैंक निर्मित कराया गया था, किंतु पानी की किल्लत और विभागीय कर्मियों से मिलीभगत कर लोगों ने टैंक को भरने वाली लाइन से ही अपने घरों के लिए कनेक्शन ले लिए, लिहाजा टैंक कभी भर ही नही पाया। जिसके बाद इंद्रवती नदी से टैंक को भरने के लिए नई लाइन डालनी पड़ी। इसके बाद भी  जोशियाड़ा इलाके में बढ़ती आवासीय कॉलोनी और कार्यलयों में पानी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए  गोफ़ियारा से ज्ञानसू को जा रही पानी की लाइन से ताम्बा खानी के पास एक 65 एमएम की लाइन दी गयी जो महीने भर से लीकेज से पानी की बर्बादी का कारण बनी हुई है। यह बताना जरूरी है कि रामलीला मैदान में बिजली की मोटर से पम्प किये गए पानी को भी इसी लाइन से डाला जाता है और लाखों खर्च कर शुद्ध किये गए पानी की इस तरह से बर्बादी हो रही है।
इस संबंध में जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता  बलदेव डोगरा में बताया कि इस स्थान पर एयर रिमूव करने के लिए जानबूझ कर कट लगाया गया है ताकि आगे तक पानी का प्रेशर बना रहे ।
अब ये तो तकनीकी मामला है कि पानी की  लाइन से हवा निकालने के लिए पानी की बर्बादी करवानी जरूरी होती है? और वो भी पुल के दोनों किनारों पर जहां पानी गिरने से इसका लोहा जंग खा रहा है। फिलहाल यह तो पता चल ही गया कि एक महीने से गिरकर बर्बाद हो रहे पानी की शिकायत कर रहे स्थानीय लोगों की बात क्यों नही सुनी गई !

Also Read This

आरोग्य मंदिर में 4 महीने से वेतन ‘लापता’, सचिवालय तक सवाल: टेंडर कंपनियां बदलती रहीं, कर्मचारियों का पेट कौन भरेगा? 

रिपोर्ट : कार्तिक उपाध्याय / हल्द्वानी हल्द्वानी में कर्मचारियों ने खोली व्यवस्था की परतें—श्रम विभाग से कुमाऊँ कमिश्नर तक गुहार का दावा, फिर भी...

उपलब्धि : लद्दाख की 6,250 मीटर ऊंची कांग यात्से–II पर लहराया शौका समाज का परचम, पहाड़ की बेटी ने रचा गौरवशाली इतिहास

डीडीहाट। 08 अगस्त 2026,नीरज उत्तराखंडी लद्दाख की 6,250 मीटर ऊंची कांग यात्से–II पर लहराया शौका समाज का परचम, पहाड़ की बेटी ने रचा गौरवशाली...

Related Posts