बड़कोट में आकाशीय बिजली गिरने से दर्जनों मवेशियों की मौत

नीरज उत्तराखंडी/उत्तरकाशी उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील के अंतर्गत धारी कलोगी क्षेत्र में आकाशीय बिजली ने ऐसा कोहराम मचाया कि ढाई दर्जन बकरियां व दो भैंसों की मौत हो गई। गनीमत यह रही कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई। जानकारी के अनुसार ग्राम धारी कलोगी में एक गौशाला में रात्रि करीब ढाई बजे आकाशीय बिजली […]

नीरज उत्तराखंडी/उत्तरकाशी

उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील के अंतर्गत धारी कलोगी क्षेत्र में आकाशीय बिजली ने ऐसा कोहराम मचाया कि ढाई दर्जन बकरियां व दो भैंसों की मौत हो गई। गनीमत यह रही कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार ग्राम धारी कलोगी में एक गौशाला में रात्रि करीब ढाई बजे आकाशीय बिजली गिर गई। इसकी चपेट में आने से वहां मौजूद करीब ढाई दर्जन बकरियां एवं दो भैंसों की मौत हो गई। हालांकि बड़कोट प्रशासन ने अभी २१ मवेशियों की मौत की पुष्टि की है। बताया गया कि गौशाला स्वामी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।


इस दुर्घटना में काश्तकार के करीब डेढ़ से दो लाख के नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। यही नहीं, रोजी-रोटी का साधन छिन जाने से उनके सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है। हालांकि ऐसी घटना में सरकार द्वारा आंक्षिक मदद भी की जाती है, लेकिन वह भी न के बराबर होती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अब उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
सूचना पर घटनास्थल के लिए राजस्व टीम और पशु विभाग के कर्मचारी रवाना हो गए हंै। तहसील प्रशासन बड़कोट से जो जानकारी उपलब्ध हुई है, उसके अनुसार रात्रि ३ बजे ग्राम तियां मध्ये दोगड़ा नामे तोक में जनानंद पुत्र बुद्धिराम 2 एवं सियाराम पुत्र बुद्धिराम निवासी ग्राम तियां की गौशालाओं में बंधे हुए दो भैंस एवं १९ बकरियों की वज्रपात के कारण मौके पर ही मौत हुई है। इसके अलावा दोनों गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई है।
प्रभावित आकलन के अनुसार ग्राम तियां के जनानंद पुत्र बुद्धिराम की ६ बकरियां एवं एक भैंस, सियाराम पुत्र बुद्धिराम की ५ बकरियां एवं एक भैंस, सतेश्वर पुत्र बुद्धिराम की ३ बकरियां, नेत्रमणि पुत्र जनानंद की ४ बकरियां एवं रतनमणि पुत्र सियाराम की एक बकरी की मौत हुई है।


उल्लेखनीय है कि उत्तरकाशी आकाशीय बिजली गिरने वाले जिलों पर सर्वाधिक संवेदनशील जिले की श्रेणी में आता है। यहां जब-तब ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। कई बार मवेशियों के साथ ही लोगों को भी जान गंवानी पड़ती है।

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