- उत्तराखंड की उधार लागत बढ़ रही है: SDL यील्ड 7.87% पहुंची, अन्य राज्यों से महंगी; राजस्व अधिशेष के बावजूद 12,464 करोड़ का बाजार उधार
देहरादून/नई दिल्ली, 28 मार्च 2026 –
उत्तराखंड सरकार की कर्ज लेने की लागत मार्च 2026 में लगातार बढ़ रही है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की हालिया नीलामियों में राज्य विकास ऋण (State Development Loans – SDL) की प्रतिफल दरें (yields) 7.6% से ऊपर पहुंच गई हैं, जो केंद्र सरकार की 10-वर्षीय प्रतिभूतियों (G-sec) की यील्ड (लगभग 6.93%) से काफी अधिक है।
खोजी विश्लेषण से पता चलता है कि यह वृद्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि कई अन्य राज्यों की वित्तीय स्थिति को भी प्रभावित कर रही है, लेकिन पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक है।
हालिया नीलामियों में उत्तराखंड की स्थिति
24 मार्च 2026 की SDL नीलामी में उत्तराखंड का भारित औसत प्रतिफल (weighted average yield) 7.872% दर्ज किया गया।
इससे पहले 17 फरवरी में यह 7.571% था, जबकि 17 मार्च 2026 को 2038 परिपक्वता वाली सुरक्षा के पुनः जारीकरण पर कट-ऑफ यील्ड 7.6291% रहा।
राज्य ने उस नीलामी में 2,000 करोड़ रुपये के अधिसूचित लक्ष्य के मुकाबले केवल 1,095.05 करोड़ रुपये ही जुटा सके और आंशिक स्वीकृति (partial acceptance) दी। लंबी अवधि (15-25 वर्ष) वाली SDLs पर यील्ड 7.6% से 8% के ऊपर चली गई है।
27 मार्च की नीलामी में 13 राज्यों ने कुल लगभग 40,000 करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन कई राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित) ने आंशिक स्वीकृति दी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण यील्ड्स में कठोरता (hardening) देखी जा रही है।
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अन्य राज्यों से तुलना मार्च 2026 की नीलामियों में उत्तराखंड की उधार लागत कई बड़े राज्यों से अपेक्षाकृत अधिक रही:
उत्तर प्रदेश: 17 मार्च को 5,000 करोड़ रुपये जुटाए, यील्ड 7.57% से 7.75% के बीच। आंशिक स्वीकृति दी, लेकिन कुल मिलाकर उत्तराखंड से बेहतर (कम) दर पर उधार।
तमिलनाडु: 17 मार्च को 8,000 करोड़ रुपये, यील्ड 7.03% से 7.57% तक (कुछ छोटी अवधि पर और कम)। बाजार में बेहतर मांग के कारण नियंत्रित दरें।
पश्चिम बंगाल: 17 मार्च को 4,000 करोड़ रुपये (19 और 23 वर्षीय), यील्ड 7.76% से 7.79%। लंबी अवधि पर उत्तराखंड जैसी चुनौतियां, लेकिन कुछ मामलों में पूर्ण स्वीकृति।
महाराष्ट्र: 17 मार्च में 6,500 करोड़ रुपये, छोटी अवधि पर 6.83% तक और लंबी अवधि पर 7.58-7.76%। अतिरिक्त (greenshoe) विकल्प का उपयोग कर मजबूत मांग दिखाई।
गुजरात: मध्यम अवधि पर 7.29-7.38% पर अतिरिक्त उधार लिया। कुछ प्रस्तावों पर बोली स्वीकार नहीं की।
24 मार्च की नीलामी में 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने औसतन 7.69% यील्ड पर उधार लिया, जो पिछली नीलामी से 16 आधार बिंदु अधिक था।
बड़े और औद्योगिक राज्यों (UP, TN, महाराष्ट्र) को बाजार में बेहतर तरलता और विश्वास मिलता है, जबकि उत्तराखंड जैसे छोटे पहाड़ी राज्य पर स्प्रेड (अतिरिक्त लागत) अधिक पड़ रहा है।
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राजस्व अधिशेष के बावजूद भारी बाजार उधार
PRS Legislative Research की उत्तराखंड बजट 2025-26 विश्लेषण के अनुसार, राज्य राजस्व अधिशेष (revenue surplus) का अनुमान लगा रहा है – 2,586 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 0.6%)।
फिर भी, राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को पूरा करने के लिए 12,605 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 2.9%) का लक्ष्य रखा गया है।
इस घाटे को वित्त-पोषित करने के लिए बाजार से शुद्ध उधार (net borrowings) 12,464 करोड़ रुपये लेने की योजना है।
कुल उधार (gross borrowings) लगभग 38,470 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें SDL मुख्य स्रोत होगा।
यह उधार मुख्य रूप से पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे, सड़कों, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे विकास कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा।
राजस्व खाते में अधिशेष होने के बावजूद पूंजीगत व्यय की उच्च मांग के कारण बाजार पर निर्भरता बढ़ रही है।
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जनता पर संभावित असर और विशेषज्ञों की चिंता
बढ़ती यील्ड से उत्तराखंड सरकार की ब्याज अदायगी में सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यदि यील्ड 8% के पार चली गई तो नई परियोजनाओं की लागत और महंगी हो जाएगी, जो अंततः टैक्सपेयर पर बोझ बनेगी। विकास कार्यों (सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य) से धन कटने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FY26 में सभी राज्यों का कुल उधार लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये पहुंचने वाला है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
उत्तराखंड को कर्ज प्रबंधन में नई रणनीति अपनानी चाहिए – छोटी अवधि के ऋण, वैकल्पिक फंडिंग स्रोतों की तलाश या वित्तीय अनुशासन सख्त करना।
यह स्थिति केवल उत्तराखंड की नहीं, बल्कि कई राज्यों की वित्तीय चुनौती को उजागर करती है।
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस बढ़ते बोझ को नियंत्रित कर पाएंगी या टैक्सपेयर को और महंगा पड़ जाएगा? हमारी टीम इस मुद्दे पर लगातार नजर रखेगी।
