सचिन के ढहलिया हाऊस के बाद हरिद्वार की इस इमारत का नंबर!

 कुमार दुष्यंत           हरिद्वार।यदि शासन-प्रशासन नियम-कानून का पालन कराने पर आमादा हो जाए तो क्या नहीँ हो सकता।यही कर दिखाया है मंसूरी में डीएमडीए ने।जहां सचिन तेंदुलकर के मित्र संजय नारंग के नियम विरुद्घ ढहलिया हाऊस में किये गये निर्माण को प्रशासन ने ढहा दिया।इसके बाद अब हरिद्वार की ऐसी ही […]

 कुमार दुष्यंत
          हरिद्वार।यदि शासन-प्रशासन नियम-कानून का पालन कराने पर आमादा हो जाए तो क्या नहीँ हो सकता।यही कर दिखाया है मंसूरी में डीएमडीए ने।जहां सचिन तेंदुलकर के मित्र संजय नारंग के नियम विरुद्घ ढहलिया हाऊस में किये गये निर्माण को प्रशासन ने ढहा दिया।इसके बाद अब हरिद्वार की ऐसी ही एक इमारत का नंबर है।अवैध रुप से खडी की गयी इस बहुमंजिली व्यावसायिक इमारत के बाहर ध्वस्तिकरण का आर्डर लेकर प्रशासन का बुलडोजर कभी भी पहुंच सकता है। 

हरिद्वार के जीरो जोन क्षेत्र में सावित्री लॉज नाम के एक भवन को दिनरात काम करवा कर चंद दिनों में भव्य व्यावसायिक इमारत में बदल दिया गया।हालांकि यह क्षेत्र नगर का सबसे व्यस्ततम क्षेत्र है।गंगा के दो सौ मीटर निकट कोई भी निर्माण न हो सकने का प्रतिबंध भी यहां लागू होता है।लेकिन इसके बावजूद खुलेआम ये विशाल इमारत खडी हो गयी।
इस बिल्डिंग के निर्माण के दौरान शहर के नियोजित निर्माण का जिम्मा संभालने वाला हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण बिल्कुल मौन बना रहा।और ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि जिले में सेवाएं दे रहे एक आईएएस अधिकारी के हित इस बिल्डिंग से जुडे हुए थे।इस आला अधिकारी के निर्देश पर ही एच आर डी ए आंख मूंदे रहा और चंद दिनों में तमाम नियम कानूनों को धता बताते हुए यह बहुमंजिली बिल्डिंग खडी कर दी गयी।अब जब सूचना आयोग ने मामले का संज्ञान लिया तो इमारत को खड़ा करवाने वाले हरिद्वार विकास प्राधिकरण को न उगलते बन रहा है।न निगलते! 
साठ कमरों व दर्जनभर दुकानों वाली इस इमारत का निर्माण बड़े ही शातिराना तरीके से किया गया।पहले तो व्यावसायिक निर्माण को आवासीय बताकर सरकार को करीब पचास लाख रुपए के राजस्व का चूना लगाया गया।दूसरे, मूल स्वामी से खरीदे बिना ही मरम्मत के नाम पर पूरी इमारत को नये निर्माण में बदल दिया गया।ऐसा इसलिए किया गया ताकि असली वारिसों के नाम सामने न आ पाएं।इमारत को एक कंपनी के नाम पर पंजीकृत कराया गया है।जिसके कितने साझीदार हैं।यह राजस्व विभाग को भी नहीं पता।हालांकि तीन करोड़ की दर्शायी गयी इस सम्पत्ति को राजस्व विभाग ने सर्किल रेट के अनुसार तेरह करोड़ रुपए की माना है।लेकिन इसका वास्तविक मूल्य इससे भी कहीं अधिक है। इसलिए यह भी अनुमान है कि इसकी खरीद-फरोख्त में भारी मात्रा में कालाधन खपाया गया है।
सूचना आयोग के आदेश के बाद अब इस बिल्डिंग को बनवा देने के लिए जिम्मेदार रहे एचआरडीए ने ही पूरी बिल्डिंग को अवैध घोषित कर दिया है।जिसके बाद निर्माण कर्ताओं द्वारा इसे कंपाउंड कराने की कोशिशें शुरु हो गयी हैं।लेकिन क्योंकि यह निर्माण एचआरडीए के मानकों के अनुसार नहीं है।इसलिए यह निर्माण कंपाउंड नहीं हो सकता।इस स्थिति में एचआरडीए के पास इसके ध्वस्तिकरण के आदेश जारी करने के सिवा कोई चारा नहीं है!

Also Read This

बदहाली : 13 साल से सड़क अधूरी, 6 साल से पुल गायब; डंडी-कंडी पर बीमार

मोरी/उत्तरकाशी। 18 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी सीमांत विकासखंड मोरी के दूरस्थ लिवाड़ी गांव में सड़क सुविधा की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। 21 वर्षीय...

बड़ी खबर :हनी मिशन में ‘मधु’ की जगह सवालों का छत्ता! घटिया बी-बॉक्स, बीमार कॉलोनी और मानकविहीन टूल किट बांटने के आरोप

मोरी, उत्तरकाशी। सितंबर 2026।नीरज उत्तराखंडी खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की हनी मिशन योजना के तहत मोरी...

Related Posts