अमित शाह की आड़ में धंधा!

कड़े निर्णय लेने में फिर ठिठके कदम दीपावली  की आड़ में डबल इंजन की सरकार एक बार फिर बैकफुट पर है। पहले दीपावली और दशहरे के नाम पर अतिक्रमण हटाओ अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अब अवैध होर्डिंगों से पूरा शहर पाट दिया गया है। मजेदार बात यह है कि मुख्यमंत्री […]

कड़े निर्णय लेने में फिर ठिठके कदम

दीपावली  की आड़ में डबल इंजन की सरकार एक बार फिर बैकफुट पर है। पहले दीपावली और दशहरे के नाम पर अतिक्रमण हटाओ अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और अब अवैध होर्डिंगों से पूरा शहर पाट दिया गया है। मजेदार बात यह है कि मुख्यमंत्री के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने भी शहर में दर्जनों अवैध होर्डिंगों पर सरकारी योजनाओं को चस्पा कर रखा है। जिस प्रदेश में मुख्यमंत्री का विभाग ही अवैध काम कर रहा हो, वहां औरों से क्या उम्मीद की जा सकती है?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के देहरादून प्रवास के बाद उत्तराखंड का तो कोई भला नहीं हुआ, किंतु कुछ धंधेबाजों की जरूर पौ-बारह हो गई। अमित शाह के देहरादून आगमन पर पूरे प्रदेश को अवैध होर्डिंगों से पाट दिया गया। छुटभैयों से लेकर मंत्री-विधायकों तक ने अवैध होर्डिंगों से शहर को बदरंग कर डाला। अमित शाह के जाने के एक महीने बाद भी नगर निगम, जिला प्रशासन या शहरी विकास विभाग के कार्मिकों की हैसियत नहीं कि वो एक भी होर्डिंग हटाने की हिम्मत कर सके। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर वर्षों से टंगा अवैध होर्डिंग अब न सिर्फ पक्का कर दिया गया है, बल्कि उस पर प्रकाश डालने के लिए बिजली की भी व्यवस्था कर दी गई है। इस अवैध होर्डिंग के ठीक सामने अमित शाह के अकेले फोटो के साथ दो विशालकाय होर्डिंग लगाए गए हैं, जिसमें अमित शाह की ओर से लिखा गया है कि संपर्क और संवाद संगठन के प्राण हैं यदि हम वह गंवा देते हैं तो संगठन से प्राण चला जाता है। अब अवैध होर्डिंग लगाने से जिस पार्टी के प्राण बच रहे हों और नगर निगम को चूना लग रहा हो, ऐसी पार्टी पार्टी विद डिफरेंस नहीं होगी तो क्या होगी। इसी के साथ लगे एक और होर्डिंग में अमित शाह की ओर से लिखा गया है कि सत्ता और शासन सुख भोगने के लिए नहीं होता। यह तो दबे, पिछड़े एवं गरीबों के कल्याण और सेवा के लिए होता है। अब ये बात कौन किसे समझाए कि नगर निगम को चूना लगाकर ऐसे होर्डिंग टांगने से यदि दबे, पिछड़े और गरीबों का कल्याण होता है तो सारी गरीबों की बस्तियों में यही होर्डिंग लगा देने चाहिए।

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