गिनीज बुक रिकॉर्ड बनाने के नजदीक पहुंचा प्रदीप

हेम पंत// गरुड़ (बागेश्वर) निवासी 18 वर्षीय युवक प्रदीप राणा रविवार को अपनी यात्रा के 101वें दिन रुद्रपुर पहुंचे। सृजन पुस्तकालय, रुद्रपुर में बातचीत करते हुए प्रदीप ने बताया कि वो अब तक लगभग 14,000 किमी का सफर पूरा कर चुके हैं और अगले हफ्ते तक 15,222 किमी का पुराना गिनीज रिकॉर्ड तोड़ देंगे। उत्तराखण्ड […]

हेम पंत//

गरुड़ (बागेश्वर) निवासी 18 वर्षीय युवक प्रदीप राणा रविवार को अपनी यात्रा के 101वें दिन रुद्रपुर पहुंचे। सृजन पुस्तकालय, रुद्रपुर में बातचीत करते हुए प्रदीप ने बताया कि वो अब तक लगभग 14,000 किमी का सफर पूरा कर चुके हैं और अगले हफ्ते तक 15,222 किमी का पुराना गिनीज रिकॉर्ड तोड़ देंगे। उत्तराखण्ड के एक छोटे से इलाके गरुड़ में प्रदीप राणा के पिताजी किशन सिंह राणा कृषक हैं, और प्रदीप इस समय देहरादून में बीएससी द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं।

पुस्तकालय में विभिन्न स्कूलों से आए हुए बच्चों को अपने अनुभव सुनाते हुए प्रदीप राणा ने बताया कि उन्होंने अपनी पहली साईकिल यात्रा अपने गाँव से काठमांडू तक की थी। एक हफ्ते में लगभग 800किमी का सफर पूरा करने के बाद उनको लगा कि वो ‘एक देश के अंदर सबसे लम्बी साईकिल यात्रा’ का गिनीज रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। इसके बाद उन्होंने लन्दन स्थित गिनीज बुक के कार्यालय में इस रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया और वहां से प्राप्त नियमों के अनुसार मई 2017 में देहरादून से अपनी यात्रा शुरू की।

प्रदीप ने बताया कि शुरुआत के कुछ दिन उन्हें होटलों में रुकना पड़ा, लेकिन नागालैंड और सिक्किम पहुँचने के बाद लोगों ने खुद ही उनके रहने और खाने की व्यवस्था करनी शुरू की। अब उनके फेसबुक पेज Wheels Covering India के माध्यम से जुड़कर लोग उनकी मदद के लिए आगे आने लगे हैं।

अब तक वो उप्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, नागालैंड, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात सहित लगभग 20 राज्यों से गुजरे हैं। उन्होने 20,000 किमी का रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य रखा है। वो अपनी आगे की यात्रा में पंजाब, हिमांचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाएंगे और यात्रा का समापन उत्तराखंड में ही करेंगे।

प्रदीप ने बताया कि वह अपनी इस यात्रा के दौरान मिलने वाले लोगों से साइकिल का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने की अपील करते हैं। साइकिल आवागमन का एक सस्ता और प्रदूषणरहित तरीका है।

बच्चों के साथ अपनी इस यात्रा के संस्मरण सुनाते हुए प्रदीप ने कहा कि हमने अपनी जिंदगी में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी मेहनत भी करनी चाहिए। सृजन पुस्तकालय में इस अवसर पर हरीश त्रिपाठी, उषा टम्टा, हेम पन्त, सन्दीप सिंह, अंशुल टण्डन, विजय पाल, सौरभ ठुकराल, अखिलेश, अमित, राहुल आदि उपस्थित रहे।

Also Read This

बदहाली : 13 साल से सड़क अधूरी, 6 साल से पुल गायब; डंडी-कंडी पर बीमार

मोरी/उत्तरकाशी। 18 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी सीमांत विकासखंड मोरी के दूरस्थ लिवाड़ी गांव में सड़क सुविधा की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। 21 वर्षीय...

बड़ी खबर :हनी मिशन में ‘मधु’ की जगह सवालों का छत्ता! घटिया बी-बॉक्स, बीमार कॉलोनी और मानकविहीन टूल किट बांटने के आरोप

मोरी, उत्तरकाशी। सितंबर 2026।नीरज उत्तराखंडी खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की हनी मिशन योजना के तहत मोरी...

Related Posts