खुलासा:जनप्रतिनिधियों के फर्जी हस्ताक्षर लेकर एनजीटी से मिले पर्यावरणविद!

गिरीश गैरोला  उत्तरकाशी पर्यावरणविदों को खुली चुनोती। स्थानीय लोगों के फर्जी हस्ताक्षर लेकर केंद्रीय मंत्री और एनजीटी के पास जाने का आरोप 25 मेगा वाट की जल विद्युत  परियोजनाओं पर रोक हटाने की मांग चीन सीमा से लगी उत्तरकाशी जनपद के हरसिल में 25 मेगा वाट जल विधुत परियोजना समेत आल वेदर रोड पर इको […]

गिरीश गैरोला 
उत्तरकाशी
पर्यावरणविदों को खुली चुनोती।
स्थानीय लोगों के फर्जी हस्ताक्षर लेकर केंद्रीय मंत्री और एनजीटी के पास जाने का आरोप
25 मेगा वाट की जल विद्युत  परियोजनाओं पर रोक हटाने की मांग
चीन सीमा से लगी उत्तरकाशी जनपद के हरसिल में 25 मेगा वाट जल विधुत परियोजना समेत आल वेदर रोड पर इको सेंसटिव ज़ोन की मार के बाद उपला टकनौर के सभी पंचायत प्रतिनिधियों ने डीएम के माध्यम से मुख्य सचिव उत्पल कुमार को ज्ञापन भेजकर न सिर्फ इको सेंसटिव ज़ोन का विरोध किया बल्कि पर्यवरण के नाम पर उनके फर्जी हस्ताक्षर लेकर एनजीटी के पास जाने पर्यवरणविदों को भी खूब खरी खोटी सुनाई।
गौरतलब है कि वर्ष 2012 में गंगोत्री से उत्तरकाशी तक 100 किमी लंबे इलाके को इको सेंसटिव ज़ोन घोषित कर दिया है। गजट नोटिफिकेशन के साथ ही इस इलाके में कई तरह के प्रतिबंध लग चुके हैं। स्थानीय निवासियों की माने तो इससे इलाके के विकास में बुरा असर पड़ रहा है।
बगोरी गांव के मानवेन्द्र रावत की माने तो उद्योग धंधे तो पहले से ही यहां नही थे किंतु अब इस कानून के बाद निर्माणाधीन और प्रस्तावित जल विधुत परियोजनाओं पर भी रोक लग गयी है। उन्होंने कहा कि गंगा के संरक्षण के लिए हरिद्वार से आगे कानून बनाये जाने की जरूरत थी जहाँ गंगा के साथ खुलकर अत्याचार हो रहा है।
श्री 5 गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि पीएम मोदी की आल वेदर रोड पर भी इस कानून की काली छाया पड़ चुकी है। चीन सीमा पर बैठे ग्रामीणों के लिए सड़क मार्ग बेहद जरूरी है। वहीं धार्मिक तीर्थ गंगोत्री धाम तक देश दुनिया के लोग पहुंचते हैं, जो सूबे की मुख्य पर्यटन से आर्थिकी भी है। ऐसे में आल वेदर रोड हर हाल में चीन सीमा और गंगोत्री धाम तक बनानी चाहिए।
 देश वासियों को स्वावलंबी बनाने वाले पीएम  मोदी के बयान को तभी फलीभूत किया जा सकता है, जब छोटी जल विद्युत  परियोजनाओं पर लगी रोक हटा दी जाय। उन्होंने कहा कि ‘रन ऑफ द रिवर’ कॉन्सेप्ट पर आधारित 25 मेगावाट की इन लघु विद्युत परियोजनाओं के निर्माण गंगा नदी पर न होकर बारहमासी गधेरों पर हो रहे हैं।
 हरसिल में काकोर गाड़  में 12.5 मेगावाट , सियान गाड़ में 11.5 मेगा वाट, और जालंधरी पर 24 मेगा वाट ये तीनों लघु जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण गंगा-भागीरथी में न होकर अन्य गधेरों – नालों पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से न तो नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और न ही पर्यावरण।
ट्रैकिंग टूर से जुड़े जयेंद्र राणा ने बताया कि कुछ लोग पर्यावरण के नाम पर स्थानीय लोगों के फर्जी हस्ताक्षर लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और एनजीटी के सामने यह कहकर उपस्थित हुए कि परियोजना और आल वेदर रोड का  विरोध करने पहुँच गए हैं जिनको इस फर्जीवाड़े का जबाब देना होगा।
उपला टकनौर के सभी 8 गांवों के पंचायत प्रतिनिधियों ने डीएम के माध्यम से मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर कहा कि 25 मेगा वाट की परियोजनों पर लगी रोक को हटा दिया जाना चाहिए। अन्यथा उन्हें बताया जाय कि वे क्या खाएं और क्या रोजगार करें।

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