खुलासा: जिला सूचना कार्यालय को बेदखली का वारंट अधिकारियों ने जानबूझकर नहीं की पैरवी

 भूपेंद्र कुमार  देहरादून के जिला सूचना अधिकारी के कार्यालय को खाली करवाने के आदेश दे दिए गए हैं। देहरादून के एस्ले हॉल में जिला सूचना कार्यालय वर्ष 1951 से संचालित हो रहा था। वर्ष 2006 में पूर्व भवन स्वामी ओम प्रकाश सुखीजा ने यह भवन डॉ बीएस जज को बेच दिया। इसकी सूचना तक जिला […]

 भूपेंद्र कुमार
 देहरादून के जिला सूचना अधिकारी के कार्यालय को खाली करवाने के आदेश दे दिए गए हैं। देहरादून के एस्ले हॉल में जिला सूचना कार्यालय वर्ष 1951 से संचालित हो रहा था। वर्ष 2006 में पूर्व भवन स्वामी ओम प्रकाश सुखीजा ने यह भवन डॉ बीएस जज को बेच दिया। इसकी सूचना तक जिला सूचना अधिकारी को नहीं दी गई। उल्टे डॉ बीएस जज ने भवन को खाली करने के लिए विभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। लेकिन समय समय पर तैनात रहे जिला सूचना अधिकारियों ने इसकी पैरवी जानबूझकर नहीं की।
 विभाग द्वारा कोई पैरवी न होने पर 31 अक्टूबर 2017 को अपर जिला जज ने नवंबर तक भवन को खाली करने के लिए आदेश कर दिए। अब जिला सूचना कार्यालय के अधिकारी अपर जिला जज के आदेश के खिलाफ अपील करने के बजाए जिलाधिकारी से कहीं और कक्ष आवंटित करने की गुहार लगा रहे हैं।
 जाहिर है कि जिला सूचना कार्यालय के अधिकारीगण भवन स्वामी से मिले हुए हैं। अथवा उन्हें इस तरह से निर्देश उच्च स्तर से प्राप्त हुए हैं। वरना भवन खाली करने के लिए जिला अधिकारी से अनुरोध करने के बजाय हायर कोर्ट में अपील की जा सकती थी।
 13 नवंबर 2017 को जिला सूचना अधिकारी अजय मोहन सकलानी ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि वह जिला सूचना कार्यालय के लिए कलेक्ट्रेट परिसर मकमे से कम तीन कक्ष आवंटित करने की कृपा करें।
 इस पर जिलाधिकारी ने कोई खास ध्यान नहीं दिया और महज खानापूर्ति के लिए एडीएम फाइनेंस को निर्देश दिए कि अगर कहीं जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के कार्यालय के आस-पास कोई कमरे खाली हो तो देख लीजिए।
 पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार भवन खाली कराने के इच्छुक कुछ लोग बराबर  सूचना विभाग के अधिकारियों के संपर्क में थे। बाद में शासन में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एक अधिकारी के निर्देश पर सूचना विभाग को इस मामले में कोई पैरवी न करने के लिए दबाव डाला गया था। सरकार को  संपत्ति के हित में पैरवी करने के बजाय विपरीत निर्देशों के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है।

Also Read This

बदहाली : 13 साल से सड़क अधूरी, 6 साल से पुल गायब; डंडी-कंडी पर बीमार

मोरी/उत्तरकाशी। 18 सितंबर। नीरज उत्तराखंडी सीमांत विकासखंड मोरी के दूरस्थ लिवाड़ी गांव में सड़क सुविधा की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। 21 वर्षीय...

बड़ी खबर :हनी मिशन में ‘मधु’ की जगह सवालों का छत्ता! घटिया बी-बॉक्स, बीमार कॉलोनी और मानकविहीन टूल किट बांटने के आरोप

मोरी, उत्तरकाशी। सितंबर 2026।नीरज उत्तराखंडी खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की हनी मिशन योजना के तहत मोरी...

Related Posts