“गौमाता” नही भटकेगी दरबदर।टैगिंग से होगी पहचान

गौ माता के अब बहुरेंगे दिन। नही खानी पड़ेगी दर दर की ठोकर। पालिका ने तैयार किया काँझी हाउस।निराश्रित गौ को मिलेगा सहारा। टैगिंग से होगी पशुओं की पहचान। गिरीश गैरोला दूध पीकर अपनी गायों को सड़क पर आवारा घूमने के लिए छोड़ने वाले लोगों की अब खैर नहीं । यातायात में बाधा बन रहे […]

गौ माता के अब बहुरेंगे दिन। नही खानी पड़ेगी दर दर की ठोकर। पालिका ने तैयार किया काँझी हाउस।निराश्रित गौ को मिलेगा सहारा। टैगिंग से होगी पशुओं की पहचान।

गिरीश गैरोला

दूध पीकर अपनी गायों को सड़क पर आवारा घूमने के लिए छोड़ने वाले लोगों की अब खैर नहीं । यातायात में बाधा बन रहे सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं के मालिकों की पहचान कर सख्त कार्यवाही करने की तैयारी शुरू हो गयी है।

गौ वंश और पशु क्रूरता निवारण समिति   की बैठक के बाद डीएम उत्तरकाशी ने पालिका को 28 फरवरी तक कांजी हाउस निर्माण कर पूरा कर उसमें नगर की  निराश्रित गायों को रखने के निर्देश दिए है । इतना ही नहीं दूध नहीं देने की स्थिति में अपने गायों को सड़क पर छोड़ देने वाले गोपालकों  की पहचान करने के लिए सभी गायों पर टैग लगाए जा रहे हैं । किसान के घर में बंधी हुई गायों पर भी यही टैग लगाए जा सकेंगे जिसकी डिजिटल जानकारी पशुपालन विभाग,  नगर पालिका और जिला प्रशासन के पास रहेगी जिसमें गाय के मालिक का नाम , गाय की प्रजाति आदि पूरा विवरण दर्ज होगा। गाय को बेचने की दशा में गौ मालिक को संबंधित  विभाग के पास जाकर विवरण टैग में दर्ज करवाना होगा । टैग लगने के बाद सभी गायों की पहचान आसान हो जाएगी और कोई भी व्यक्ति अपने गाय को सड़क पर आवारा घूमने के लिए नहीं छोड़ पाएगा । ऐसा करने वालों के खिलाफ पहचान के बाद कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। डीएम उत्तरकाशी डॉक्टर आशीष कुमार चौहान एवं गंगोत्री के विधायक गोपाल सिंह रावत ने कलेक्ट्रेट में एक गाय पर इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाकर इसकी शुरुआत कर दी है ।28 फरवरी के बाद नगर की सभी निराश्रित गायों को गौशाला में आश्रय मिलेगा।  नगरपालिका और पशुपालन विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर सभी गायों पर टैग लगाने का काम में लग गए है।
उत्तराखंड में यह पहल सबसे पहले उत्तरकाशी में शुरू रही है।


Zee max आईटी के वाइस प्रेसिडेंट आशीष कंडवाल ने बताया कि पशुओं के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए ये टैग एक इंजेक्शन के माध्यम से पशुओं की त्वचा के अंदर इंजेक्ट किए जाते हैं, जिन्हें एक डिवाइस के जरिए रीड किया जा सकता है। 10 वर्ष से अधिक तक यह मशीन काम करती है और किसी भी तापमान पर काम कर सकती है। इस इंजेक्ट किए गए टैक्स से पशुओं को कोई नुकसान नहीं होता है। इतना ही नहीं पशु के चोरी हो जाने पर भी इसकी पहचान की जा सकती है। एनिमल टैग में  पशु की ब्रीड और उसके मालिक का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। इस वक्त उत्तरकाशी पालिका क्षेत्र में करीब 700 गाय हैं। उत्तराखंड प्रदेश में सबसे पहले गाय पर टैगिंग  की  शुरुआत उत्तरकाशी जनपद से की जा रही है।

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