बीटेक पास युवक दिल्ली से लौटा गांव, दे रहा बेरोजगारी को मात

संजय बुड़ाकोटी, पौड़ी// मशरूम की खेती से बेरोजगारी को मात दे रहा सुशांत पंत इस बार आपको एक ऐसे युवक से मिलाते हैं, जो बीटेक करने के बाद पौड़ी गढ़वाल के अपने पुश्तैनी कुसली गांव में आकर मशरूम उत्पादन का मन बनाता है। इस युवक का नाम है सुशांत पंत। चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र का एक […]

संजय बुड़ाकोटी, पौड़ी//

मशरूम की खेती से बेरोजगारी को मात दे रहा सुशांत पंत

इस बार आपको एक ऐसे युवक से मिलाते हैं, जो बीटेक करने के बाद पौड़ी गढ़वाल के अपने पुश्तैनी कुसली गांव में आकर मशरूम उत्पादन का मन बनाता है। इस युवक का नाम है सुशांत पंत। चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र का एक छोटा सा गांव है कुसली गांव। यह एकेश्वर ब्लॉक में पड़ता है। पहले यहां ४५-५० परिवारों का एक हंसता-खेलता गांव हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे यहां पलायन की मार पड़ती गई और यहां के परिवार मैदानी क्षेत्रों में बसते गए और यहां के अधिकांश घर खाली हो गए और उनमें ताले पड़ गए। अब यहां मात्र १४-१५ परिवार ही रह गए हैं और अब यहां पहले जैसी चहल-पहल खत्म हो गई है।
सुशांत पंत के बारे में बताना जरूरी है कि सुशांत का जन्म दिल्ली में हुआ। उसकी पढ़ाई-लिखाई भी दिल्ली में रहकर ही हुई। बाद में सुशांत ने जयपुर से बीटेक किया।
सुशांत पंत के अनुसार बीटेक करने के बाद उसने 6-7 महीने इधर-उधर नौकरी की खोजबीन की। अधिकांश जगहों से रिस्पोंस मिलने के बाद मैंने महसूस किया कि बीटेक करने के बाद महज 15-20 हजार रुपए की नौकरी ही मिल रही है। वह भी पक्की नहीं है। इसके बाद मैंने सोचा कि पहाड़ों से लगातार पलायन हो रहा है। उनके गांव से भी अधिकांश घर खाली हो चुके हैं। क्यों न अपने गांव में जाकर ही स्वरोजगार को अपनाया जाए। मैंने इंटरनेट पर सर्च किया और मशरूम उत्पादन के बारे में काफी कुछ जाना। फिर देहरादून में एक जगह से मशरूम उत्पादन की बेसिक ट्रेनिंग ली और फिर अपने गांव का रुख कर लिया।
सुशांत कहते हैं कि इस काम को करने में उनके घरवालों का भी विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने उन्हें नौकरी करने को लेकर कभी दबाव नहीं डाला। उन्हें शुरुआती दौर में मशरूम उत्पादन में बड़ी कठिनाई हुई। पहली फसल उनकी सफल नहीं हो पाई, लेकिन दूसरी फसल में उन्हें जो सफलता मिली, उससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला। इस बार उनका ४० किलो मशरूम उत्पादन हुआ।
सुशांत अभी अपने पुराने घर के दो कमरों, जबकि एक कमरे के आधे भाग में मशरूम उगा रहे हैं। मार्केटिंग के बारे में पूछने पर बताते हैं कि यह भी बड़ी समस्या है। हालांकि यह अलग बात है कि ४० किलो मशरूम की खपत उनके और आस-पास के गांवों में ही हो गई। उनका प्लान है कि आगे वह अपने उत्पादन को और बढ़ाएंगे।
गांव के अन्य युवकों को अपने साथ जोडऩे के सवाल पर वह कहते हैं कि उनका तो यही मकसद है कि गांव के बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार मिले। अभी एक-दो युवाओं ने उनके साथ जुडऩे की बात कही है। वह इसके लिए मशरूम किट स्वयं तैयार करते हैं। भूसा कोटद्वार से लाना पड़ता है। पुराली के साथ मिलकर वह इसे तैयार करते हैं।
कुल मिलाकर उनकी मेहनत रंग लाई तो वीरान होते गांव में एक बार फिर रौनक लौट सकती है।

Also Read This

एक्शन : भू-माफियाओं पर प्रशासन का बड़ा एक्शन । पीड़िता को दिलाई 25 नाली पैतृक भूमि

नैनीताल, 06 अगस्त 2026। नीरज उत्तराखंडी नैनीताल जिले में भू-माफियाओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक असहाय महिला को उसकी 25...

जॉब्स अपडेट : एनटीपीसी में डिप्टी मैनेजर के 135 पदों पर भर्ती, ₹2 लाख तक मिलेगी सैलरी

देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) ने डिप्टी मैनेजर भर्ती 2026 के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।...

Related Posts