त्रिवेेंद्र रावत के मीडिया मैनेजर नेे खोली सरकार की पोल!

उत्तराखंड  सरकार में मीडिया मैनेजर धूम मचाए हुए हैं। सरकार जिन मैनेजरों पर हर महीने तब लाखों रुपए खर्चा कर रही है, जबकि वृद्धावस्था व विकलांग पेंशन देने तक के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। एक ओर सरकार महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तनख्वाह पर पल रहे मैनेजर सरकार […]

उत्तराखंड  सरकार में मीडिया मैनेजर धूम मचाए हुए हैं। सरकार जिन मैनेजरों पर हर महीने तब लाखों रुपए खर्चा कर रही है, जबकि वृद्धावस्था व विकलांग पेंशन देने तक के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है। एक ओर सरकार महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तनख्वाह पर पल रहे मैनेजर सरकार की नाक में दम कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव की भांति विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी ने महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाकर लोगों से वोट मांगे थे और सरकार आने पर महंगाई पर अंकुश लगाने की बात भी कही थी।


2014 के लोकसभा चुनाव के बाद महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर है। उस समय मिलने वाला घरेलू गैस का सिलेंडर दोगुनी कीमत पर पहुंच चुका है। 70 रुपए किलो वाली दाल 200 का शीर्षस्थ आंकड़ा छू चुकी है। फल-सब्जी के दाम आम आदमी की पहुंच से लगातार दूर हो रहे हैं। इस बीच सरकार जीएसटी ले आई। जीएसटी आने के बाद इसे देशहित में बताया गया।
भारतीय जनता पार्टी के लोग घर-घर जाकर जीएसटी के फायदे से देश का हो रहा विकास बता रहे हैैं। वहीं लोग जीएसटी आने के बाद बढ़ी महंगाई से परेशान हैं। उत्तराखंड सरकार व भारतीय जनता पार्टी संगठन के लोग ही जीएसटी की फाइलों पर हर दिन लंबे-चौड़े व्याख्यान देते दिखाई देते हैं और महंगाई को अपने अनुसार ही परिभाषित करते रहते हैं।
इस बीच उत्तराखंड सरकार द्वारा दस माह के भीतर 68.59 लाख के चाय-पकोड़े खाने का शोर मचा तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार बैकफुट पर आ गई। पहले तो सरकार केे लोग चिर-परिचित अंदाज में पहले की विपक्ष की सरकार और अपनी सरकार के खर्चे के आंकड़े दिखाकर जान बचाने लगी, किंतु जब इसमें भी सफलता नहीं मिली तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया कॉर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत ने एक ऐसा स्पष्टीकरण दिया, जिससे जीएसटी से महंगाई बढऩे पर सरकार की पोल खुल गई। 68.59 लाख के चाय-पकोड़े के खर्चे के बारे में मीडिया कॉर्डिनेटर दर्शन सिंह रावत ने बताया कि चाय-पकोड़े पर यह खर्चा जीएसटी के कारण आया है। यदि जीएसटी लागू नहीं होता तो यह खर्चा कम होता। दर्शन सिंह रावत ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि जीएसटी लागू होने से पहले नाश्ते पर केवल 5 प्रतिशत वैट लगता था, किंतु जीएसटी लागू होने के बाद यह 12.5 प्रतिशत हो गया और यही एकमात्र कारण है कि चाय पकोड़े का बिल 68.59 लाख हो गया है।
बहरहाल, मीडिया मैनेजर द्वारा जीएसटी पर स्थिति स्पष्ट करने से साफ हो गया है कि डबल इंजन की सरकार भले ही जीएसटी को लेकर कितने भी दावे कर ले, किंतु यह मीडिया कॉर्डिनेटर ने साफ कर लिया है कि जीएसटी के कारण देश में महंगाई बढ़ी है। देखना है कि अब सरकार मीडिया मैनेजर की बात को किस अंदाज में पुष्ट करती है।

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