ठेकेदार टापते रह गए,अफसर ने चहेते को ही दिया टेंडर

ठेकेदारों की यूनियन धरी रह गयी। मिलीभगत से अपने चहेते को ठेका देने का आरोप। गिरीश गैरोला ऊर्जा निगम मनेरी उत्तरकाशी के अधिशासी अभियंता अभय सिंह के खिलाफ टेंडर में घपला कर अपने चहेतों को काम देने का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासी घनश्याम चौहान ने डीएम को शिकायती पत्र भेजा है। अपनी शिकायत में […]

ठेकेदारों की यूनियन धरी रह गयी।
मिलीभगत से अपने चहेते को ठेका देने का आरोप।
गिरीश गैरोला
ऊर्जा निगम मनेरी उत्तरकाशी के अधिशासी अभियंता अभय सिंह के खिलाफ टेंडर में घपला कर अपने चहेतों को काम देने का आरोप लगाते हुए स्थानीय निवासी घनश्याम चौहान ने डीएम को शिकायती पत्र भेजा है। अपनी शिकायत में उन्होंने उनकी निविदा को जानबूझकर निरस्त करने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि जल विद्युत निगम मनेरी प्रथम में साफ सफाई के लिए हर वर्ष की भांति इस बार भी निविदाएं आमंत्रित की गई थी , जिसमें करीब दो दर्जन ठेकेदारों ने टेंडर लिए थे । आरोप है कि टेंडर खोलते समय ठेकेदारों को बुलाया नही गया।
   सूत्रों की माने तो ठेकेदारों ने आपसी यूनियन कर किसी एक ठेकेदार को टेंडर डालने के लिए राजी कर लिया था।  ठेकेदारों की आपसी यूनियन के बाद किसी एक व्यक्ति का नाम तय हो भी गया था। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदार से ले- देकर कम रेट वाली अन्य निविदाओं को निरस्त करते हुए एस्टिमेट रेट से 2 प्रतिशत ऊपर साफ सफाई का ठेका अपने खास के नाम स्वीकृत कर दिया।  हीना गांव के  निवासी घनश्याम चौहान ने आरोप लगाया कि उनके निविदा में अनुभव प्रमाण पत्र न होने की बात बताकर उनका आवेदन  निरस्त किया गया है।  जबकि पिछले वर्ष इसी कार्य का टेंडर घनश्याम चौहान के नाम ही निकला था और उनके द्वारा ही साफ सफाई का काम वर्ष भर किया गया, जिसका उन्हें विधिवत भुगतान भी हुआ जबकि  इस बार अधिकारी जानबूझकर उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र ही नहीं दे रहे और इसी के चलते उनका टेंडर निरस्त कर दिया गया।
  इस संबंध में अधिशासी अभियंता अभय सिंह ने बताया घनश्याम चौहान द्वारा नियम और शर्तों के अनुसार पूरे प्रपत्र नहीं लगाए गए थे, जिसके कारण उनके द्वारा भरा गया टेंडर निरस्त कर दिया गया । पिछले वर्ष काम करने वाले ठेकेदार को अनुभव प्रमाण पत्र क्यों नही दिया गया ! इसके जबाब में उन्होंने कहा कि ठेकेदार द्वारा अनुभव प्रमाण पत्र के लिए आवेदन ही नही किया गया था।

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