त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल

भूपेंद्र कुमार     मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के खिलाफ कांग्रेस से बागी बन कर भाजपा में आए विधायकों का सब्र एक साल का भी इंतजार न कर सका।  10 माह पूरे भी न हुए थे कि हरिद्वार के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ बगावत के […]

भूपेंद्र कुमार
    मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के खिलाफ कांग्रेस से बागी बन कर भाजपा में आए विधायकों का सब्र एक साल का भी इंतजार न कर सका।
 10 माह पूरे भी न हुए थे कि हरिद्वार के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ बगावत के सुर बुलंद कर दिए हैं।
 कुंवर प्रणव चैंपियन ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की शिकायत 13 फरवरी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करने का ऐलान किया है।त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस के मुद्दे को महज एक जुमला बताते हुए कहा कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। और वह अपनी बात अब सीधे हाईकमान से रखेंगे।
 कुंवर प्रणव चैंपियन ने सरकार पर जमकर भड़ास निकालते हुए कहा कि उन्हें मंत्री बनने का भी कोई लालच नहीं है। उनके सामने मंत्री संत्री कुछ नहीं होते। वह शेर हैं और शेर ही रहेंगे। जाहिर है कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की नाराजगी आसानी से थमने वाली नही है।
 दरअसल कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन हरिद्वार की जिला पंचायत हरिद्वार मे सरकार के हस्तक्षेप को लेकर के नाराज हैं।
 कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की पत्नी कुंवरानी देवयानी हरिद्वार की जिला पंचायत सदस्य हैं।
 सरकार से सकारात्मक रुख न मिलने के कारण  प्रणव सिंह चैंपियन नाराज बताए जा रहे हैं। कुंवर प्रणव सिंह की नाराजगी सार्वजनिक होते ही संगठन और बड़े नेता बगावत की आग पर पानी डालने के लिए दौड़ पड़े हैं।
 फिलहाल कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन एक बार अपनी बात कहने के बाद खामोश हो गए हैं। पर्वतजन संवाददाता ने उनके कई फोन नंबरों पर उनसे बात करने की कोशिश की। बड़ी मुश्किल से एक नंबर पर संपर्क हुआ तो उनके सहयोगी ने फोन उठाते हुए Champion के उपलब्ध ना होने की बात कहते हुए फोन रख दिया।
 हरिद्वार के खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन अपने बागी, उग्र और आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं।
 चैंपियन के बारे में यह एक सियासी तथ्य है कि वह लाग लपेट और सियासी प्रपंचों के चक्कर में नहीं पड़ते। यही कारण है कि कांग्रेस सरकार में विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन विजय बहुगुणा से भी नाराज रहे और हरीश रावत से भी उनकी नहीं पटी।
 
 अब यह आशा जताई जा रही हैं कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को ढाल बनाते हुए बाकी नाराज और पुराने बागी विधायक त्रिवेंद्र रावत सरकार के नेतृत्व के खिलाफ अपना बिगुल फूंक सकते हैं।
 भाजपा आलाकमान राज्य में नेतृत्व परिवर्तन करने के पक्ष में नहीं रहा है। किंतु उत्तराखंड में एक साल पूरा होने से पहले कुछ और बागी और नाराज विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को आगे रखते हुए हाईकमान तक त्रिवेंद्र रावत सरकार के प्रति अपनी नाराजगी का इजहार कर सकते हैं।
 त्रिवेंद्र सरकार के ढीलेपन को लेकर हाईकमान भी संतुष्ट नहीं है। आगामी लोकसभा चुनाव को महज एक साल ही बाकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ से देश के आम चुनाव का बिगुल फूंकने के लिए संकल्पबद्ध है। ऐसे में केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यों में धीमी गति और राज्य में विकास कार्यों के प्रति धीमा रवैया मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
ऐसे में यदि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के तेवर शांत नहीं हुए तो सरकार के नेतृत्व को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है।

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