पीडि़त पिता पस्त, मित्र पुलिस मस्त!

कुलदीप एस राणा// एकलौते जवान बेटे की मौत की फरियाद लेकर एक बार फिर डीजीपी अनिल रतूड़ी से मिलने आये विनोद कुमार से जब पुलिस मुख्यालय में बात की तो वह रोते-रोते अपना दुखड़ा सुनाने लगा। “साहब मेरा नाम विनोद है मैं शिमला बायपास सड़क से सटे हुए गणेशपुर के पास भुड़पुर गाँव का रहने वाला […]

कुलदीप एस राणा//

एकलौते जवान बेटे की मौत की फरियाद लेकर एक बार फिर डीजीपी अनिल रतूड़ी से मिलने आये विनोद कुमार से जब पुलिस मुख्यालय में बात की तो वह रोते-रोते अपना दुखड़ा सुनाने लगा। “साहब मेरा नाम विनोद है मैं शिमला बायपास सड़क से सटे हुए गणेशपुर के पास भुड़पुर गाँव का रहने वाला हूँ, सेलाकुई में सिक्योरिटी गार्ड की नोकरी करता हूँ। साहब मेरा 14 साल का एकलौता जवान लड़का था राहुल (सोनू)। 14 अक्टूबर 2017 को वह घर से अपनी माँ को कह यह कह कर निकला तहस कि खेलने जा रहा हूँ।  सड़क के किनारे-किनारे जाते हुए भी वहां से गुजरने वाले सीमेंट से लदे एक  ट्रक ने उसे टक्कर मार कर घायल कर दिया जिससे उसकी मृत्यु हो गयी। मेरा एक ही लड़का था साब , यह कहते हुए विनोद कुमार पुलिस मुख्यालय में ही फफक-फफक कर रो पड़ा । मेरा बेटा मुझसे कहता था पापा मैं बड़ा होकर फ़ौज में जाऊंगा। इसलिए मैं दौड़ता ओर खेलता हूँ जिससे फ़ौज के लिए फिट हो सकूँ। मेरा लड़का पढ़ने लिखने में भी अच्छा था साब।


एकलौते जवान संतान की मृत्य का शोक कितना गहरा होता यह मायूस विनोद कुमार की डबडबाई आंखों में देख कर महसूस किया जा सकता है।
संदेह के घेरे में पुलिसिया कार्यवाही
दुर्घटना की सूचना पर प्रेमनगर हॉस्पिटल पहुची पटेलनगर पुलिस द्वारा विनोद कुमार के पुत्र के शव के पंचनामा की कार्यवाही में स्पष्ट  लिखा है कि घायल को 108 एम्बुलेंस के माध्यम घटनास्थल से अस्पताल  पहुचाया गया था अब सवाल यह उठता है कि  पुलिस द्वारा तत्काल उक्त ट्रक की खोजबीन के प्रयास क्यों नही किये गए और घटनास्थल से कोई सुराग खोजने का प्रयास क्यों नही किया।


अलबत्ता 24 अक्टूबर को जब मृतक  राहुल के परिजन  पुलिस के पास रिपोर्ट लिखाने गए तो उल्टा देर से रिपार्ट लिखाने पर परिजनों को ही डांटने लगे । पुत्र शोक में डूबे व्यक्ति से इस तरह का व्यवहार क्या पुलिस की सवेंदनहिंता को प्रदर्शित नही करता?
वारदात को लगभग 4 माह से अभी अधिक समय बीत चुका है  लेकिन संबंधित पटेलनगर थाने की पुलिस  न तो अज्ञात ट्रक का पता लगा पाई है और न ड्राइवर का कोई सुराग जुटा सकी है। अपितु अपनी नाकामियों पर पुलिस का कहना है कि देर से एफआईआर लिखाने के कारण घटना से संबंधित सारे सुराग मिल नही पा रहे है  हमने घटनास्थल के आसपास से  संबंधित लोगो से पूछताछ  भी की उससे भी हमे कुछ हासिल नही हुआ ।जल्दी रिपोर्ट लिखते तो कुछ हो सकता था  हमारे पास और भी बहुत से काम होते है।
यहां हम आपको बता दे कि ट्रांसपोर्ट नगर व सेलाकुई से आनेजाने वाले भारी वाहनों के कारण शिमला बायपास गणेशपुर रोड पर सड़क दुर्घटनाओं में  वहां से गुजरने वालों की मारे जाने की खबरे आये दिन अखबारों की सुर्खियां होती है । लेकिन कारोबारियों के ये ट्रक ड्राइवर दुर्घटना करके फरार हो जाते है और ट्रक तक पुलिस के हत्थे नही चढ़ते।
स्थानीय जनता इन दुर्घटनाओं के लिए सीधे तौर पर पुलिस को जिम्मेदार मानती है। उनका कहना है कि  बीती तमाम दुर्घटनाओं पर भी पुलिस की मौन कार्यवाही इन ट्रांसपोर्टरों के साथ सांठगांठ का संदेह पैदा करती है।
मित्र पुलिस कितनी सवेंदनहीन हो चुकी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि थाने चौकी से निराश होकर विनोद कुमार जैसे गरीब फरियादियों को बार-बार सूबे की पुलिस के मुखिया डीजीपी अनिल रतूड़ी के पास गुहार लगाने को मजबूर होना पड़ता है।
न्याय की आस  पुलिस मुख्यालय आये विनोद कुमार ने बताया कि ” आज फिर मैंने डीजीपी साहब  से गुहार लगाई तो उन्होंने  एसएसपी मैडम को फोन कर  आरोपी को जल्द पकड़ने को कहा। अब तक मैं एसएसपी देहरादून कुकरेती मैडम, डीआईजी गढ़वाल पुष्पक ज्योति , डीजीपी अनिल रतूड़ी और शासन में प्रमुख सचिव गृह तक लिखित  फरियाद कर चुका हूं, लेकिन मुझे अभी तक न्याय नही मिल पाया है। ओर न ही मुझे सड़क दुर्घटना में परिजन के मारे जाने का कोई  मुआवजा।

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