मोरी मे भीषण आग से गांव खाक। 40 परिवार प्रभावित

चिरंजीव सेमवाल उत्तरकाशी : जिले के मोरी विकास खंड मैं भीषण अग्नि कांड से सोणी गांव के 40 परिवार प्रभावित होने की सूचना है घटना मध्यरात्रि की बताई गई हैं। मोरी मे आग लगने की ये 14 वीं घटना हैं। डीएम आशीष चौहान मोरी के लिए रवाना उत्तरकाशी जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान आग के चपेट […]

चिरंजीव सेमवाल

उत्तरकाशी : जिले के मोरी विकास खंड मैं भीषण अग्नि कांड से सोणी गांव के 40 परिवार प्रभावित होने की सूचना है घटना मध्यरात्रि की बताई गई हैं। मोरी मे आग लगने की ये 14 वीं घटना हैं।

डीएम आशीष चौहान मोरी के लिए रवाना
उत्तरकाशी जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान आग के चपेट में आये सौवनी गांव के जायजा लेने लिए रवाना हो चुके है।
पशुपालन विभाग, कृषि, पूर्ति, पेयजल आदि विभागों के अधिकारी, कर्मचारी भी रवाना हो चुके हैं। जबकि स्थानीय क्षेत्र में तैनात अधिकारी, कर्मचारी राहत एवं बचाव दल के साथ राहत कार्य में जुटे हैं।
पशुपालन विभाग, कृषि, पूर्ति, पेयजल आदि विभागों के अधिकारी, कर्मचारी भी रवाना हो चुके हैं। जबकि स्थानीय क्षेत्र में तैनात अधिकारी, कर्मचारी राहत एवं बचाव दल के साथ राहत कार्य में जुटे हैं।
तहसील मोरी के अन्तर्गत रात्रि समय लगभग 1 बजे सोवनी गांव मे आग लगने की सूचना मिलते ही डीएम डां आशीष चौहान ने एस.डी.एम.पुरोला, पूरण सिंह राना. नायब तहसीलदार मोरी, राजस्व उप निरीक्षक मोरी जखोल,फायर ब्रिगेड बडकोट तथा 108 आपातकालीन सेवा पुरोला व मोरी व राजस्व टीम, पुलिस, को आवश्यक उपकरणों के साथ घटना स्थल हेतु रवाना कर दिया गया था।

अग्निकांड में स्थानीय पटवारी से मिली जानकारी के अनुसार 22 मकान जलकर राख हो गए। जबकि डेढ़ सौ जानवर भी जलकर राख हो गये।

आपदा कन्ट्रोल रुम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मोरी विकास खण्ड के सौणी गांव में करीब 1 बजे रात्रि को आग लगने से 46 परिवार प्रभावित हुए हैं। आग लगने से भवन एवं पशुओं की हानि हुई है। जबकि उक्त घटना से कोई जनहानि नहीं हुई है। राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन मुस्तैदी से राहत कार्य में जुटी है। जबकि आज प्रातः ही जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान, जिला मुख्यालय से संबंधित विभागों के अधिकारियों को लेकर सौणी गांव के रवाना हो चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सिद्ध रावत बताते हैं कि यदि इस इलाके में अधिकांश मकान लकड़ी और घास फूस से बने होते हैं। पारंपरिक रुप से बने चीड़ और देवदार की लकड़ी के इन मकानों में से यदि कहीं पर भी आग लग जाए तो  पूरे इलाके में आग फैलते देर नहीं लगती। ग्रामीणों को ऐसे मकान बनाने से बचना चाहिए अथवा  आग बुझाने की यंत्रों का प्रयोग करना चाहिए।

 

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