एक्सक्लूसिव वीडियो: उमा भारती बोली गंगोत्री से साधुओं को बाहर फेकेंगे।

गंगोत्री नेशनल पार्क की पाबंदियों के  नाम पर गुफाओं में साधनारत साधुओं को उठा कर बाहर फेंकने की तैयारी। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने बयान में किया था खुलासा । वन विभाग ने शुरू किया साधु संतों की कुटिया का सर्वेक्षण गंगोत्री नेशनल पार्क में 33 तो गंगोत्री रेंज में 54 कुटिया हुई चिन्हित […]

गंगोत्री नेशनल पार्क की पाबंदियों के  नाम पर गुफाओं में साधनारत साधुओं को उठा कर बाहर फेंकने की तैयारी।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने बयान में किया था खुलासा ।
वन विभाग ने शुरू किया साधु संतों की कुटिया का सर्वेक्षण
गंगोत्री नेशनल पार्क में 33 तो गंगोत्री रेंज में 54 कुटिया हुई चिन्हित
गिरीश गैरोला
उत्तरकाशी जिले से लगे गंगोत्री धाम और गोमुख क्षेत्र को जोड़ते हुए गंगोत्री नेशनल पार्क में वर्षों से साधनारत साधुओं को उखाड़ फेंकने की वन एवं पर्यावरण महकमे की तैयारी शुरू हो गई है। ये दावा हम नही खुद bjp की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने उत्तरकाशी में पिछले दौरे में किया है।
गंगोत्री धाम से लगे उच्च हिमालयी क्षेत्र में साधना कर रहे साधुओं ने केंद्र सरकार को अपनी विपदा भरी कहानी लिखी है जिसमें उन्होंने वर्षों से साधना कर रहे साधुओं को अपनी कुटिया  में रहने के कानूनी अधिकार देने की मांग की है। जिसके बाद वन महकमे ने इसका सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।
 जनवरी 2017 में राजस्व विभाग की टीम के साथ वन महकमे का संयुक्त सर्वेक्षण हो चुका है जिसमें गंगोत्री नेशनल पार्क के अंदर 33 और गंगोत्री रेंज के अंदर 54  कुटियाओं को चिन्हित किया गया है।
 गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज ऑफिसर प्रताप पंवार ने बताया कि साधु संतों की तरफ से भारत सरकार को एक पत्र लिखा गया था जिसमें उन्हें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उनकी कुटिया में वर्ष भर साधना के लिए रहने के कानूनी अधिकार दिए जाने की मांग की गई है।
 अपने पत्र में साधुओं  ने तीर्थ स्थल गंगोत्री धाम से लगे क्षेत्र को नेशनल पार्क घोषित करने पर भी आपत्ति जताई है । साधु संतों के पत्र के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है । जिसके बाद वन विभाग ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर उच्च हिमालय क्षेत्र में रहने वाले साधु सन्यासियों की सभी कुटियाओं  का सर्वेक्षण किया।
गौरतलब है कि अपने पिछले उत्तरकाशी दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने साफ कहा था कि गोमुख गंगोत्री क्षेत्र में इको सेंसिटिव जोन के नाम पर साधु-संन्यासियों को उनकी कुटिया से उठा उठा कर बाहर फेंका जा रहा है। जिसके लिए पिछली सरकार में वे खुद पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और अपनी सरकार में  प्रकाश जावड़ेकर से स्वयं मिली है।
 उमा भारती ने कहा कि स्थानीय लोग इको सेंसटिव ज़ोन  के कांसेप्ट को अपनाना चाहते हैं लेकिन इसके लिए कानून को व्यवहारिक होना जरूरी है। अन्यथा इसको लेकर स्थानीय लोगों में इतनी कठिनाई पैदा हो जाएगी कि उन्हें जंगली जीवन की तरफ लौटना पड़ेगा उन्होंने खुद अपनी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अंधाधुंध जंगल कट रहे हैं और जो छोटे लोग पकड़े जा रहे हैं उन्हें चोर बताया जा रहा है। जबकि बड़े तस्कर लाखों करोड़ों रुपए कमा कर जंगलों को साफ कर रहे हैं। इसके बावजूद भी वह पकड़ से बाहर हैं केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के साथ ऑल वेदर रोड का कांसेप्ट चल रहा है।  विकास के कार्य में कानूनी अड़चन नहीं आनी चाहिए और विकास के कांसेप्ट में पर्यावरण का उल्लंघन भी नहीं होना चाहिए।

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