खुलासा: इसलिए क्रैश हुआ एमआई-17

केदारनाथ में आज सुबह 8:30 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुए वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की जांच करने गई टीम ने पाया कि हेलीकॉप्टर क्षमता से अधिक ओवरलोड था इसलिए लैंडिंग करते समय संतुलन न बना पाने के कारण क्रैश हो गया। पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार यह हेलीकॉप्टर पहले भी कुछ खराब चल रहा था। इसकी मरम्मत […]

केदारनाथ में आज सुबह 8:30 बजे दुर्घटनाग्रस्त हुए वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की जांच करने गई टीम ने पाया कि हेलीकॉप्टर क्षमता से अधिक ओवरलोड था इसलिए लैंडिंग करते समय संतुलन न बना पाने के कारण क्रैश हो गया। पर्वतजन के सूत्रों के अनुसार यह हेलीकॉप्टर पहले भी कुछ खराब चल रहा था। इसकी मरम्मत करने के लिए देहरादून से ओएनजीसी के साइंटिस्टों की टीम 4 दिन पहले केदारनाथ आई थी। उस समय हेलीकॉप्टर के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट सिस्टम में कुछ गड़बड़ी थी। इस हेलीकॉप्टर को भारी मशीनों के पार्ट ढोने के काम में लाया जा रहा था।
 गौरतलब है कि केदारनाथ में भारी भरकम मशीनों को पहुंचाने का काम एक प्राइवेट ठेकेदार को दिया गया है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि जब मशीनों के पार्ट ढोने का काम एक प्राइवेट ठेकेदार को दिया गया था तो वह सेना के हेलीकॉप्टर का प्रयोग क्यों कर रहा था और इसके प्रयोग में आने वाले भारी भरकम खर्च की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाती अथवा ठेकेदार यह भी स्पष्ट नहीं है।
 एमआई-17 हेलीकॉप्टर अपना पहला चक्कर सुबह 6:30 बजे ही लगा चुका था। दूसरा चक्कर लगाने के दौरान यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटनास्थल की जानकारी के अनुसार पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए नरम मिट्टी वाली सतह पर हेलीकॉप्टर को गिराया। यदि यह कठोर धरातल पर टकराता तो इस में भयानक आग लग सकती थी। ऐसे में कोई भी जीवित नहीं बचता।
 घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार केदारनाथ घाटी में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम के समुचित उपाय नहीं अपनाए गए हैं और ना ही इसके प्रति कभी गंभीरता दिखाई गई।
 यहां पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट की स्थापना की जानी चाहिए थी लेकिन यह अभी तक नहीं की गई है।
 केदारनाथ जैसी अत्यधिक ऊंचाई पर भारी भरकम हेलीकॉप्टर के मूवमेंट को लेकर कोई अतिरिक्त सतर्कता नहीं बरती गई। रियल टाइम मौसम की जानकारी और हवा की स्पीड की जानकारी देने के लिए भी यहां पर कोई सिस्टम नहीं स्थापित किया गया है। और यहां पर कोई ग्राउंड स्टाफ भी तैनात नहीं है जो पायलट को हवा की दिशा और स्पीड के बारे में सिग्नल दे सकता।
 इस हेलिपैड की उपयोगिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर अंबानी सरीके उद्योगपति भी कई बार उतरे हैं। इसके बावजूद इस तरह की लापरवाहियों के प्रति किसी ने ना तो ध्यान दिलाया और ना शासन में किसी ने संज्ञान ही लिया। एक तरह से सब केदार बाबा के भरोसे ही चल रहा था।
 यहां पर वर्ष 2013 की आपदा के दौरान भी एक एमआई-17 गिर चुका है और दो हेलीकॉप्टर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह चौथा हादसा था।
 देखना यह है कि इसके बावजूद उत्तराखंड का उड्डयन विभाग तथा शासन सरकार में बैठे आला अधिकारी इस दुर्घटना से क्या सबक लेते हैं।

Also Read This

बिग ब्रेकिंग : धामी कैबिनेट के महत्पूर्ण फैसले

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक...

डॉ० बी० पी० नैथानी एवं उनकी स्वछता टीम ने नवनियुक्त CMO डॉ० मेघना असवाल का किया आत्मीय स्वागत व अभिनन्दन

श्रीनगर (गढ़वाल): जयप्रकाश नौगाई  ​पौड़ी जनपद में नवनियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ० मेघना असवाल के प्रथम आगमन पर उनका जोरदार स्वागत व अभिनन्दन किया...

Related Posts